प्रेमानन्द जी महाराज ने बताया सच्ची समृद्धि का मार्ग, नाम-जप और कर्म से ही बदलता है जीवन
Shri Premanand Ji Maharaj About Numerology: यह धारणा तेजी से फैल रही है कि नाम की स्पेलिंग बदलने, किसी अक्षर में 'A' या 'P' जोड़ने, अंक बदलने या अंगूठी-छल्ला पहन लेने से जीवन अचानक बदल जाएगा।
- Written By: सिमरन सिंह
क्या है viral सच्चाई। (सौ. Pinterest)
Karma and Dharma: आज के समय में यह धारणा तेजी से फैल रही है कि नाम की स्पेलिंग बदलने, किसी अक्षर में ‘A’ या ‘P’ जोड़ने, अंक बदलने या अंगूठी-छल्ला पहन लेने से जीवन अचानक बदल जाएगा और व्यक्ति धनवान बन जाएगा। श्री प्रेमानंद जी महाराज ऐसी सतही धारणाओं को सिरे से खारिज करते हैं। उनके अनुसार स्पेलिंग बदलना, अंगूठी पहनना, छल्ला या जंतु बाँध लेना सब बकवास है और लोगों को भ्रम में डालने का माध्यम मात्र।
भौतिक उपायों का भ्रम
महाराज जी कहते हैं कि समृद्धि को बाहरी वस्तुओं से जोड़ना बुद्धिहीनता है। यदि किसी घर में विशेष वस्तुएँ रख देने से कोई करोड़पति बन सकता, तो उन्हें बनाने-बेचने वाला स्वयं अरब-खरबपति होता। यदि अंगूठी पहनने से भाग्य बदलता, तो अंगूठियाँ बेचने वाला सोने के महल में रहता फुटपाथ पर नहीं। इसलिए वे लोगों को चेताते हैं कि तुम ड्रामा में फंस जाते हो बुद्धि का प्रयोग करें और दिखावे के जाल में न उलझें।
प्रारब्ध, भक्ति और वास्तविक सफलता
महाराज जी के अनुसार मानव जीवन का मूल संचालन प्रारब्ध से होता है। बुरे प्रारब्ध को बिना सच्चे आध्यात्मिक अनुशासन भागवत अनुष्ठान के बदला नहीं जा सकता। यदि किसी को इन सतही उपायों के बाद थोड़ी सफलता दिख भी जाए, तो वह उपाय की वजह से नहीं, बल्कि तुक्का लग जाए जैसी स्थिति होती है। वास्तव में तब पूर्व का पुण्य प्रकाशित हो जाए और अस्थायी फल देता है।
सम्बंधित ख़बरें
Ekadashi August 2026: अगस्त में कब हैं कामिका और पुत्रदा एकादशी? नोट करें व्रत की डेट और पारण का समय
Sawan Kalashtami 2026: आज सावन कालाष्टमी पर करें भगवान काल भैरव की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व
शीतलाष्टमी पर चुपचाप कर लें ये 7 अचूक उपाय, नौकरी, कारोबार और परिवार की बड़ी परेशानियां हो सकती हैं दूर
बेलपत्र नहीं… इस शिव मंदिर में भोलेनाथ को चढ़ता है जिंदा केकड़ा, आखिर क्या है सदियों पुरानी रहस्यमयी परंपरा
लेकिन यह सफलता स्थायी नहीं बना। समय आने पर वर्तमान और पूर्व पापों का भार जब एक साथ पड़ता है, तो धमाका होता है और सब नष्ट भ्रष्ट हो जाएगा जिसे कोई नहीं रोक सकता।
स्थायी मंगल का सच्चा मार्ग
महाराज जी बताते हैं कि लोग ड्रामेबाज़ी और नाटकबाज़ी इसलिए चुनते हैं क्योंकि इनमें मेहनत नहीं करनी पड़ती। जबकि सत्य का मार्ग कठिन है, पर वही फलदायी है। वास्तविक मंगल के लिए
- नाम-जप और भजन: ईमानदारी से नाम जप कर, भजन और तप करें।
- सदाचार: सभी से अच्छा व्यवहार, पाप आचरण न करो, पवित्र आचरण रखो।
- परोपकार और धर्म: परोपकारी का सदा मंगल होता है।
- सहनशीलता: यदि दुख भोगना पड़ रहा है, तो धैर्य रखें।
ये भी पढ़े: आज कहां है वह स्थान, जहां रची गई थी महाभारत? जानिए पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी पूरी कहानी
वर्तमान दुख सहकर और नाम-जप करते हुए आगे बढ़ने से भविष्य में बहुत प्रगति निश्चित होती है; अगला जीवन भी मंगलमय बनता है, क्योंकि आत्मा अविनाशी है। सिद्धांत को समझो और बनावतीपन से दूर रहो। सही मार्ग कठिन है, पर यही लौकिक और पारलौकिक दोनों उन्नति का एकमात्र रास्ता है।
