

Ekadashi Vrat Ke Niyam: परिवर्तनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इसे पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है। परिवर्तनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जा रहा है।
माना जाता है कि आज के दिन भगवान विष्णु के चतुर्मास शयनकाल में करवट बदलने का दिन है, इसलिए इसे परिवर्तनी एकादशी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
अगर आप इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा कर रहे हैं, तो पूजा में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं।
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। परिवर्तनी एकादशी पर भगवान विष्णु को भोग-प्रसाद के साथ तुलसी दल भी अर्पित करें। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। पूजा के दौरान स्वच्छ तुलसी दल अर्पित कर भगवान विष्णु का स्मरण किया जाता है।
श्री हरि भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग को शुभ माना जाता है। इस दिन उन्हें पीले फूल, खासकर गेंदे के फूल अर्पित किए जाते हैं। फूल चढ़ाते समय भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें और उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करना शुभ माना जाता है।
परिवर्तनी एकादशी पर भगवान विष्णु को केले सहित मौसमी फलों का भोग लगाया जा सकता है। व्रत रखने वाले लोग भी अपनी व्रत परंपरा के अनुसार फलाहार में फलों का सेवन करते हैं। भगवान को भोग स्वरूप फल अर्पित करना सात्विक भोग का हिस्सा माना जाता है।
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत भगवान विष्णु की पूजा का मुख्य प्रसाद होता है, जो उन्हें अर्पित किया जाता है। पंचामृत का भोग भगवान विष्मु को अतिप्रिय माना जाता है। इसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में सभी को अवश्य बांटे।
एकादशी की शुभ तिथि पर आप विष्णुजी को चूरमे का भोग लगाएं। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक प्रभु की पूजा व आरती करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। परिवर्तनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
पार्श्व एकादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार से भी जोड़ा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और उनकी कथा का श्रवण कई स्थानों पर किया जाता है।