महाभारत काल की वो कहानी जहां नाराज होकर पांडवों को शिवजी ने नहीं दिए थे दर्शन, आज होती है विशेष पूजा
Panch Kedar Yatra History: उत्तराखंड के पंच केदार भगवान शिव के पांच पवित्र धाम हैं, जिनका संबंध महाभारत काल से माना जाता है। जानिए पंच केदार की धार्मिक महत्ता और पौराणिक कथा।
- Written By: अपूर्वा नायक
पंच केदार यात्रा 2026 (सौ. AI Generated Image )
Panch Kedar Yatra History Significance: उत्तराखंड जिसे देव भूमि भी कहा जाता है, यहां ना केवल चार धामों का वास है बल्कि यहां स्वयं देवी देवता निवास करते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव का निवास पहाड़ों में ही होता है। ऐसे में हिमालय की गोद में बसे केदारखंड या गढ़वाल में पंच केदार को शिवजी के लिए समर्पित सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।
पंच केदार जिसके नाम से ही ये स्पष्ट होता है कि यहां पांच तीर्थ स्थलों का संगम होता है। अक्षय तृतीया के बाद से ही हिमाचल में बसे इन पंच केदारों के द्वारा भी अपने भक्तों के लिए खुल जाते हैं। ये पंच केदार मंदिर है – केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पनाथ और मध्य महेश्वर।
महाभारत से जुड़ा है इतिहास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी और माता कुंती के साथ गुरुओं की हत्या और भाईओं की हत्या के पाप का प्रायश्चित करने की यात्रा पर निकल पड़े। भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने एक बैल का रूप धारण किया और हिमालय के गढ़वाल की ओर बढ़कर अन्य पशुओं के झुंड में जाकर छिप गए।
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पांडव जैसे ही भगवान शिव को ढूंढ़ते हुए गुप्तकाशी पहुंचे तो भीम ने अपनी अलौकिक दृष्टि से महादेव को पहचान लिया। जैसे ही वे भगवान शिव जो एक बैल के रूप में थे उन्हें पकड़ने गए, वे धरती मां की गोद में समा गए। भीम ने उनकी पीठ (कूबड़) को कसकर पकड़ लिया, जिसके बाद बैल रूपी भगवान शिव के विभिन्न अंगों से पंच केदार की स्थापना हुई।
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पंच केदार का पारंपारिक क्रम
1. केदारनाथ: केदारनाथ जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे दार्शनिक और पवित्र ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है। ये पंच केदार का पहला और सबसे मुख्य धाम माना जाता है, जहां भगवान शिव के कूबड़ (पीठ) की पूजा की जाती है।
2. तुंगनाथ: तुंगनाथ भगवान शिव का सबसे ऊंचाई पर स्थित मंदिर है। यहां महादेव की भुजाओं यानी बाहों की पूजा होती है। इसके अलावा ये चंद्रशिला पीक के लिए भी मशहूर है, जहां से आप हिमालय पर्वत श्रृंखला का 360 डिग्री व्यू देख सकते है।
3. रुद्रनाथ: रुद्रनाथ में भगवान शिव के मुख यानी चेहरे के दर्शन होते हैं। हालांकि इस यात्रा को सबसे दुर्गम और कठिन माना जाता है।
4. मध्यमहेश्वर: पंच केदारों में स्थित इस मंदिर में भगवान शिव की नाभि की पूजा की जाती है। ये उत्तराखंड के उखीमठ के रियासी से लगभग 16 किमी दूर स्थित है।
5. कल्पेश्वर: कल्पेश्वर को पंच केदार का अंतिम और सबसे सुलभ मंदिर कहा जाता है, क्योंकि ये मंदिर पूरे साल खुला रहता है। इस मंदिर में भगवान शिव की जटाओं यानी बालों की पूजा होती है।
