Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर जलदान से क्या होगा? जानिए किस दिशा में जल भरा पात्र लाएगा खुशहाली
Nirjala Ekadashi 2026 Upay: निर्जला एकादशी के दिन जलदान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जानिए वास्तु के अनुसार किस दिशा में जल से भरा पात्र रखने से घर में खुशहाली आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (सौ.सोशल मीडिया)
Nirjala Ekadashi Prosperity And Happiness Remedies: 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। सनातन हिन्दू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत को सभी एकादशी व्रतों में सर्वोत्तम और अधिक पुण्यफल देने वाली मानी गयी है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी सभी एकादशी व्रतों का फल दे देती है। ये व्रत रखने से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी पर जलदान का विशेष महत्व
धर्म शास्त्रों में निर्जला एकादशी के दिन जलदान का विशेष महत्व बताया गया है। क्योंकि ये व्रत ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में पड़ता है। इस गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना बहुत ही पुण्य का काम माना गया है। जलदान सबसे बड़ा और सर्वोत्तम दान माना गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, निर्जला एकदशी पर पानी से जुड़ी गलती घर-परिवार में विशेष प्रभाव डाल सकती है?
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निर्जला एकदशी पर पानी से जुड़ी न करें ये गलती
निर्जला एकादशी के दिन जल का सम्मान करना चाहिए। इस दिन जल का सम्मान करने का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटी हुई बाल्टी, खाली घड़े, गंदे पानी वाले बर्तन या अनुपयोगी जल के बरतन घर से बाहर कर दें।
इनको घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। कई मान्यताओं में इसको नकारात्मकता की वजह बताया गया है। इसके अलावा, इस दिन भूलकर भी वेबवजह पानी बर्बाद न करें।
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वास्तु शास्त्र में जल तत्व का क्या महत्व है?
वास्तु शास्त्र में जल तत्व को शुद्धता, समृद्धि और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि घर में जल का संतुलन और उसका सही स्थान पर होना परिवार के वातावरण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जल से जुड़े स्थानों और पात्रों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
ईशान कोण में जल पात्र रखने की मान्यता
वास्तु के अनुसार घर का उत्तर-पूर्व दिशा वाला भाग, जिसे ईशान कोण कहा जाता जल तत्व और देव शक्ति से जुड़ा माना जाता है। इस दिशा को अत्यंत शुभ कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन यहां स्वच्छ जल से भरा पात्र रखने से घर में पॉजिटिव एनर्जी फैलाती है। कई लोग इस दिन तांबे, चांदी या मिट्टी के पात्र में जल भरकर भगवान विष्णु का स्मरण करते है।
