माता दुर्गा (सौ.सोशल मीडिया)
Navratri Siddh Mantras: आज हिंदू नववर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत हो गई है। पूरे देशभर में माता रानी की पूजा-अर्चना की जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाली इस महापर्व को माता दुर्गा की असीम शक्ति और भक्ति का प्रतीक बताया गया है।
इस दौरान माता के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही नौ दिन तक भक्त उपवास भी रखते है।
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि का पूजन और व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि, नवरात्रि के समय में माता रानी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और सभी कष्टों व दुखों को हर लेती है।
नवरात्रि की पूजा के दौरान मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों का जाप अवश्य किया जाता है। मान्यता है कि मंत्रों का जाप करने से माता रानी जल्द प्रसन्न होती है। माता रानी के इन मंत्रों के जप से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। मां की कृपा पाने और अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए नवरात्रि के दौरान करें विशेष मंत्र।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥
हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥
2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
3. रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥
4. देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥
5. जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥
6. सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥
7. दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
8. शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥
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9. देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
10. नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे |
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||