आज नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता की पूजा से संतान प्राप्ति के बनते हैं योग

Maa Skandamata Aarti:आज नवरात्र का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा करने पर संतान सुख की प्राप्ति के योग बनते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
Navratri Fifth Day
मां स्कंदमाता (सौ.AI)
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Maa Skandamata Puja : आज 23 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है। जो मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। शास्त्रों में माता दुर्गा के पांचवें स्वरूप को यह नाम भगवान कार्तिकेय से मिला है और इस रूप में माता के ममतामई स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है।

कहा जाता है कि,स्कंदमाता की पूजा से संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं और बच्चों की सुरक्षा तथा उन्नति के लिए उनका विशेष आशीर्वाद मिलता है। जिन लोगों को संतान से जुड़ी चिंता होती है, उनके लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

नवरात्र के पांचवें दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

आज 23 मार्च 2026 को नवरात्र की पंचमी तिथि पर स्‍कंदमाता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त -

  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:06 बजे से 05:53 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:21 बजे से 01:09 बजे तक
  • शाम को पूजा-आरती का मुहूर्त - शाम 06:50 बजे से 08:01 बजे तक

कैसे करें स्कंदमाता की पूजा विधि

  • सबसे पहले चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  •  इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें।
  • चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश रखें।
  • उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।
  • इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।
  • इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवा नाम तुम्हारा आता। सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी। तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हर दम तुम्हे ध्याता रहूं मैं। कई नामो से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा। कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा। हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये, तेरे भगत प्यारे भगति। अपनी मुझे दिला दो शक्ति, मेरी बिगड़ी बना दो। इन्दर आदी देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे। दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये। दासो को सदा बचाने आई, चमन की आस पुजाने आई।। स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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