

Navratri spiritual journey: नवरात्रि को आमतौर पर मां दुर्गा की पूजा, व्रत, गरबा और उत्सव के रूप में मनाया जाता है, लेकिन आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से भी नवरात्रि के 9 दिन और 9 रातों का गहरा अर्थ है। शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को नवमी के साथ नौ दिन पूरे होंगे। 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।
नवरात्रि के 9 दिन और मां दुर्गा की 9 शक्तियां अपने भीतर झांकने, पुरानी आदतों और भावनात्मक उलझनों को पहचानने और मन को स्थिर करने का अवसर है। देवी के शक्ति स्वरूप की पूजा के साथ यह समय अपने भीतर मौजूद शक्ति को पहचानने और उसे सही दिशा देने की साधना का समय है।
शक्ति का अर्थ केवल देवी की आराधना नहीं है। इसे उस ऊर्जा के रूप में भी समझा जाना चाहिए, जो व्यक्ति को बदलाव, संघर्ष और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ाती है। हमारे भीतर डर, अहंकार, लालच, क्रोध, आलस्य और पुराने इमोशनल पैटर्न जैसी कई चीजें होती हैं। नवरात्रि की साधना इनसे भागने के बजाय इन्हें पहचानने और इनसे बाहर निकलने का मार्ग है।
नवरात्रि के शुरुआती तीन दिनों को मां काली की शक्ति से जोड़ा जाता है। काली का स्वरूप उस शक्ति का प्रतीक माना जाता है जो डर, अंधकार और नकारात्मकता का सामना करने का साहस देती है। साधक के लिए इसका अर्थ अपने भीतर झांकना है। कौन-सी आदत बार-बार आपको पीछे की ओर खींचती है? किस डर के कारण आप कोई फैसला नहीं ले पाते? किस चीज से जरूरत से ज्यादा लगाव है?
इन सवालों से बचने के बजाय उन्हें स्वीकार करना और उनसे धीरे-धीरे बाहर निकलने की कोशिश करें।
नवरात्रि के बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी की शक्ति से जुड़े होते हैं। यहां लक्ष्मी का अर्थ केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जीवन में मौजूद ऊर्जा, आपकी क्षमता और समृद्धि को बैलेंस करने से जोड़ा जाता है।
इस चरण में व्यक्ति को यह तय करना होता है कि उसकी ऊर्जा कहां खर्च हो रही है। क्या वह लगातार चिंता में अपनी ऊर्जा गंवा रहा है? क्या उसकी इच्छाएं उसे नियंत्रित कर रही हैं? या वह अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर रहा है? इसका अर्थ यह है कि मुश्किल भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें समझकर अपनी ऊर्जा को क्रिएटिविटी की ओर मोड़ना चाहिए।
नवरात्रि के अंतिम तीन दिन मां सरस्वती से जुड़े हैं। सरस्वती बुद्धि, ज्ञान, विवेक और चेतना का प्रतीक हैं। यह चरण बाहरी शोर से थोड़ा हटकर अपने विचारों और अनुभवों को समझने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देता है। इस दौरान मन में स्पष्टता लाना, अपनी प्रतिक्रियाओं को समझना और चीजों को अधिक जागरूकता के साथ देखा जाना चाहिए।
भारतीय दर्शन में तमस, रजस और सत्व तीन गुणों का बखान मिलता है, जो व्यक्ति के व्यवहार और उसकी मानसिक प्रवृत्ति से जुड़ा होता है। इसे आसान भाषा में समझें, तो- पहले अपने भीतर मौजूद नकारात्मक को पहचानिए, फिर अपनी सक्रिय ऊर्जा को सही दिशा देना और अंत में क्लेरिफिकेशन और बैलेंस की ओर आगे बढ़ना।
इन नौ दिनों में पूजा-पाठ के साथ अपने लिए थोड़ा शांत समय निकाल कर रोज कुछ समय ध्यान, मंत्र जाप, प्रार्थना या मौन में बिताएं। हर रात एक छोटी सी डायरी में सवाल लिखना आत्ममंथन का तरीका बन सकता है।