21 श्रृंगार का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Mahakumbh 2025: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में आज महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान चल रहा है इस दौरान बड़ी संख्या में नागा साधु और आम भक्त डुबकी लगा रहे है। नागा साधुओं को सबसे पहले स्नान का सौभाग्य मिलता है तो वहीं उनसे जुड़े कई रहस्य हमेशा चर्चा के विषय बने रहते है। नागा साधुओं का जीवन और रहन-सहन सबसे अलग होता है जिसके बारे में हर किसी को जानकारी नहीं होती है।
वैसे तो जानकारी में नागा साधु के केवल 17 श्रृंगार का वर्णन किया गया है लेकिन 5 श्रृंगार और होते है जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती है। इस खास तरह के रहस्य को जानने के लिए चलिए जानते है…
रहस्य की मानें तो, नागा साधु विशेष 17 प्रकार के श्रृंगार करते है जो जरूरी माने गए है, चलिए जानते है इसका अर्थ..
भस्मी: नागा साधु अपने शरीर पर भस्मी लगाते हैं। उनका मानना है कि यह जीव की सत्यता का आभास कराती है। वे मौत के बाद भी इसे शरीर पर मलवाते हैं।
चंदन: हलाहल विष पीने वाले भगवान शिव को चंदन लगाया जाता है, इस नागा साधु भी अपने हाथ, माथे और गले में लगाते हैं।
रुद्राक्ष: माना जाता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसू हैं। नागा साधु सिर, गले और बाजुओं पर धारण करके रखते हैं। उनका मानना कि इससे उन्हें शिव के साथ एहसास होने की अनुभूति होती है।
तिलक: नागा साधु त्रिपुंड तिलक लगाते हैं, उनका मानना है कि इससे वे महादेव के भक्त के रूप में पहचाने जाते हैं।
चिमटा: चिमटा एक तरह से नागा साधुओं का अस्त्र भी माना गया है। साथ ही वे इसी से कीर्तन आदि भी करते हैं।
डमरू: भगवान शिव के हाथों में डमरू विराजमान रहता है, इस कारण नागा साधु भी अपने श्रृंगार में इसे शामिल रखते हैं।
कमंडल: जल लेकर चलने के लिए नागा साधु अपने साथ कमंडल भी रखते हैं।
सूरमा: नागा साधु अपनी आखों में सूरमा लगाते हैं।
कड़ा: नागा साधु अपने हाथों और पैरों में चांदी, लोहा, तांबा और पीतल का कड़ा पहनते हैं। माना जाता है कि यह भगवान शिव के पैरों में विराजमान है, इससे उन्हें उनके प्रति समर्पित होने की अनुभूति होती है।
पंचकेश: नागा साधु की जटाएं अलग ही होती है। यह प्राकृतिक रूप से गुथी होती है और इन्हें नागा 5 बार लपेटकर पंचकेश श्रृंगार करते हैं।
लंगोट: नागा साधु के श्रृंगार में भगवा लंगोट भी शामिल होता है।
अंगूठी: नागा साधु अपने हाथों में कई प्रकार की अंगूठी भी धारण करते हैं।
रोली: नागा साधु अपने माथे पर भभूत के अलावा रोली का लेप भी लगाते हैं।
कुंडल: नागा साधु अपने कानों में चांदी या सोने के बड़े-बड़े कुंडल धारण करते हैं, जो सूर्य और चंद्रमा के प्रतीक होते हैं।
माला: नागा के श्रृंगार में फूल के मालाएं भी शामिल हैं, जब ये अमृत स्नान के लिए जाते हैं तो इसे अवश्य धारण करते हैं।
साधना: सर्वमंगल की कामना के लिए नागा साधु जो साधना करते हैं, इसे भी इनका श्रृंगार माना जाता है।
विभूति का लेप: नागा साधू विभूति का भी लेप लगाते हैं।
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मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, इन बताए गए 17 श्रृंगार के अलावा 5 श्रृंगार और करते है जिनके बारे में कम लोगों को ही जानकारी होती है। नागाओं के 5 श्रृंगार में प्रवचन औऱ मधुर वाणी को तो शामिल करते ही है। वहीं पर इसके अलावा मृत्यु का श्रृंगार, साधना और सेवा का भी श्रृंगार शामिल होता है। कहते हैं मां गंगा से मिलने या स्नान करने के पहले नागा साधु यह श्रृंगार करते है।