गणेशोत्सव के दिनों में कैसे करें विघ्नहर्ता की पूजा ! जानिए व्रत-पूजन की विधि
गणेशोत्सव पर विघ्नहर्ता की कृपा प्राप्त करने के लिए साधक व्रत रखते हैं। मान्यता है कि व्रत के दौरान खानपान के नियमों का पालन न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रह जाता है। इसलिए पूरे विधान से व्रत का पालन करना चाहिए।
- Written By: रीना पंवार
(फोटो सोर्स सोशल मीडिया)
गणेशोत्सव (Ganesh Chaturthi 2024) की शुरुआत आज शनिवार, 7 सितंबर 2024 से हो चुकी है। यह महोत्सव हर साल 10 दिनों तक बड़े उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान कठिन व्रत और सच्चे भाव से पूजा करने पर जातक को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान के आशीर्वाद से जीवन में शुभता का आगमन होता है।
इस शुभ अवसर पर विघ्नहर्ता की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त गण व्रत भी रखते है। ऐसी मान्यता है कि व्रत के दौरान खानपान के नियम का पालन न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रह जाता है। अगर आप भी गणेश चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं, तो ऐसे में आइए जान लेते हैं कि व्रत के दौरान किन चीजों का सेवन कर सकते हैं…….
व्रत में क्या खाएं
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गणेश चतुर्थी के व्रत के दौरान सात्विक भोजन या फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए। व्रत में साबूदाने की खीर, मिठाई और कुट्टू के आटे की पकौड़ी का सेवन किया जा सकता है। सेब, अनार, केला आदि चीजों को भी फलाहार में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा दूध और दही को भी व्रत थाली में शामिल किया जा सकता है। साथ ही साथ , भगवान गणेश को मेवे का भोग लगाकर व्रती इनका सेवन कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से गणपति बप्पा प्रसन्न होकर साधक की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।
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कैसे करें गणेश चतुर्थी का व्रत
-गणेश चतुर्थी के दिन स्नान आदि करने के बाद मंदिर की सफाई करें। सफाई के बाद एक चौकी लें और उसपर भगवान गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें।
-इसके बाद कलश स्थापित करें और विधि पूर्वक गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करें। अब गणेश जी को कुमकुम, अक्षत, चंदन और फूल अर्पित करें।
-भगवान की प्रतिमा के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। घी का दीपक जलाकर आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ कर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें।
-व्रत के दौरान दिन में भजन-कीर्तन भी कर सकते हैं। संध्याकाल में प्रभु की आरती करें और मोतीचूर के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।
-इसके बाद फलाहार करें और अगले दिन पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें।
प्रथम पूज्य देवता है श्री गणेश
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि गणपति सभी दिशाओं के स्वामी हैं और उनकी आज्ञा के बिना देवता पूजा स्थल पर नहीं पहुंचते। गणेश जी सबसे पहले दिशाओं की बाधा दूर करते हैं, यही कारण है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा से पहले भगवान गणपति का आह्वान अवश्य किया जाता है।
लेखिका- सीमा कुमारी
