उज्जैन: 41 किलो चांदी से चमका चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह, गुप्त दान की हो रही चर्चा। देखें VIDEO
Ujjain Chintaman Ganesh Temple: उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में अज्ञात दानदाता ने 41 किलो शुद्ध चांदी दान की। गर्भगृह की दीवारों पर हुई भव्य सजावट ने भक्तों की आस्था और आकर्षण को और बढ़ा दिया।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Chintaman Ganesh Temple: यह वीडियो उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर के गर्भगृह में एक अद्भुत और दिव्य बदलाव देखने को मिला है। एक अज्ञात दानदाता ने निस्वार्थ भावना से मंदिर को 41 किलो शुद्ध चांदी भेंट की है, जिसका उपयोग गर्भगृह की आंतरिक दीवारों को सजाने में किया गया है। इस दान से गर्भगृह का स्वरूप अब अत्यंत भव्य हो गया है, जहाँ दीवारों पर की गई विशेष नक्काशी और भगवान गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि का अंकन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
मंदिर समिति के अनुसार, यह जटिल कार्य विशेषज्ञ कारीगरों द्वारा लगभग 15 दिनों के अथक परिश्रम से पूरा किया गया है। दानदाता ने अपनी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी है, जो भारतीय संस्कृति में ‘गुप्त दान’ के उच्च आदर्शों को दर्शाता है। यह घटना न केवल मंदिर की शोभा बढ़ा रही है, बल्कि भक्तों के बीच आस्था और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण भी पेश कर रही है।मंदिर प्रशासन ने दानदाता की इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पहचान गोपनीय रखी है, जिसे भारतीय संस्कृति में ‘दान’ का सबसे उच्च आदर्श माना गया है।
Chintaman Ganesh Temple: यह वीडियो उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर के गर्भगृह में एक अद्भुत और दिव्य बदलाव देखने को मिला है। एक अज्ञात दानदाता ने निस्वार्थ भावना से मंदिर को 41 किलो शुद्ध चांदी भेंट की है, जिसका उपयोग गर्भगृह की आंतरिक दीवारों को सजाने में किया गया है। इस दान से गर्भगृह का स्वरूप अब अत्यंत भव्य हो गया है, जहाँ दीवारों पर की गई विशेष नक्काशी और भगवान गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि का अंकन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
मंदिर समिति के अनुसार, यह जटिल कार्य विशेषज्ञ कारीगरों द्वारा लगभग 15 दिनों के अथक परिश्रम से पूरा किया गया है। दानदाता ने अपनी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी है, जो भारतीय संस्कृति में ‘गुप्त दान’ के उच्च आदर्शों को दर्शाता है। यह घटना न केवल मंदिर की शोभा बढ़ा रही है, बल्कि भक्तों के बीच आस्था और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण भी पेश कर रही है।मंदिर प्रशासन ने दानदाता की इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पहचान गोपनीय रखी है, जिसे भारतीय संस्कृति में ‘दान’ का सबसे उच्च आदर्श माना गया है।
