सूर्य देव ( सौ. AI)
Surya Arghya Rules: सूर्य देव की उपासना के लिए ‘मेष संक्रांति’ का पर्व विशेष महत्व रखता है। इस साल यह संक्रांति 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपने उच्च की राशि ‘मेष’ में प्रवेश करते हैं, तो इसे मेष संक्रांति कहा जाता है।
सनातन धर्म में सूर्य देव की उपासना का विशेष पर्व ‘मेष संक्रांति’ (Mesha Sankranti) विशेष महत्व रखता है। ज्योतिष में सूर्य देव को ‘ग्रहों का राजा’ कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति रोजाना सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य देता है, उसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके प्रभाव से न सिर्फ समाज में मान-सम्मान बढ़ता है, बल्कि करियर व नौकरी में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।
मेष संक्रांति पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल के छींटे आपके पैरों पर न पड़ें। ऐसे में आप नीचे कोई खाली गमला या पात्र रख सकते हैं, ताकि जल उसी में गिरे। इसके साथ ही हमेशा सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि इस धातु को सूर्य देव से जोड़कर देखा जाता है।
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मेष संक्रांति पर पवित्र नदी जैसे गंगा आदि में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलकार स्नान करें। अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और इस मंत्र का जप करें –
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर।।