मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण क्यों है जरूरी? सरल और सुखमय जीवन चाहते हैं तो तुरंत पढ़ें और अमल करें
Ancestor Peace Rituals:मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है, और मानसिक शांति प्रदान करता है।
- Written By: सीमा कुमारी
मौनी अमावस्या (सौ.सोशल मीडिया)
Significance of Mauni Amavasya: रविवार, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या सनातन धर्म की सबसे पुण्यदायी तिथियों में मानी जाती है। माघ मास की इस अमावस्या पर गंगा स्नान और मौन व्रत को सबसे बड़ा तप कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन मौन और संयम से किया गया स्नान आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सुख-शांति का मार्ग खोलता है।
यदि आप अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, तो मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद तर्पण अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में आने वाले कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि मौनी अमावस्या 2026 पर पूर्वजों का तर्पण किस विधि से करना शुभ रहता है।
मौनी अमावस्या पर पूर्वजों का तर्पण किस विधि से करना शुभ
- ज्योतिष एवं धर्म गुरु के अनुसार, इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें।
- अगर ऐसा संभव नहीं है, तो घर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- इसके बाद पितरों का ध्यान करें।
- तांबे के लोटा में जल लें और काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करें।
- पितरों को सात्विक भोजन अर्पित करें।
- इसके बाद मंदिर या गरीब लोगों में अन्न, धन, कपड़े और तिल का दान करें।
- पूर्वजों को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धा अनुसार गरीब जरूरतमंदो लोगों या मंदिर में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
अमावस्या के दिन पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना उत्तम माना जाता है।
- पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध करना चाहिए।
- इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष की समस्या से मुक्ति मिलती है।
- अनाज, तिल समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए।
- इससे जातक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
- इसके अलावा पीपल के पेड़ की पूजा जरूर करें।
- पेड़ की 5 या 11 बार परिक्रमा लगाएं। सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या का दिन भगवान विष्णु और पितरों को समर्पित माना जाता है। इस दिन मौन व्रत, स्नान और तर्पण करने से मानसिक शांति मिलती है, पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट व बाधाएं दूर होती हैं।
