जानें मंगला गौरी व्रत की महिमा (सौं.सोशल मीडिया)
सावन के महीने में आज सुहागिन महिलाओं द्वारा मंगला गौरी व्रत रखा जाता है जो पति की लंबी आयु के लिए विधि-विधान से महिलाएं रखती है। सावन के महीने में रखे जाने वाले इस व्रत की महिमा इतनी खास है कि, इसे करने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं का निवारण होकर अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत के दिन भगवान शिव औऱ माता पार्वती की पूजा एक साथ करने का नियम होता है। चलिए जानते है व्रत से जुड़े पूजा के मंत्र और पौराणिक कथा के बारे में।
हिंदू पंचाग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 23 जुलाई को सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक है इस मौके पर ही सावन माह का पहला मंगला गौरी व्रत 23 जुलाई को ही रखा जाएगा। इस मौके पर आप विधि विधान के साथ पूजा करने के साथ ही इन खास चमत्कारी मंत्रों का भी जाप कर सकते है।
1. सर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरणनेताम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ..
2. ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा ..
इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है जिसके अनुसार,एक समय की बात है एक शहर में धर्मपाल नाम का एक व्यापारी रहता था. उसकी पत्नी बहुत खूबसूरत थी और उसके पास काफी संपत्ति थी लेकिन, उनके कोई संतान नहीं होने के कारण वे काफी दुखी रहा करते थे. भगवान की कृपा से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन, वह अल्पायु था. उनके पुत्र को श्राप मिला था कि 6 वर्ष की आयु में सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी, संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई जिसका माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी।
16 वर्ष की उम्र में सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी, परिणामस्वरुप उसने अपनी पुत्री के लिए एक ऐसे सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था. जिसके कारण वह कभी भी विधवा नहीं हो सकती थी. इस कारण धर्मपाल के पुत्र की आयु 100 साल की हुई।
जो नवविवाहित महिलाएं इस पूजा को करती है और मंगला गौरी व्रत का पालन करती हैं और अपने लिए लंबे और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. उनकी मनोकामना पूरी होती है. जो महिलाएं उपवास नहीं कर सकती वह मां मंगला गौरी की पूजा कर सकती हैं।
मंगला गौरी व्रत की कथा सुनने के बाद सुहागिन महिलाओं को अपनी सास और ननद को लड्डू देना होता है। वहीं पर साथ ही ब्राह्मणों को भी प्रसाद दिया जाता है. इस विधि को करने के बाद 16 बाती का दिया जलाकर मां मंगला गौरी की आरती करें. अंत में मां गौरी के सामने हाथ जोड़कर पूजा में किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। माना जाता है कि, इस व्रत को लगातार परिवार की खुशी के लिए 5 सालों तक कर सकते है।