मकर संक्रांति (सौ.सोशल मीडिया)
Makar Sankranti 2026 Astrology Tips: हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण शुरू होता है। इस दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य मिलता है। साथ ही इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन रंगों को लेकर भी मान्यता है कि किन रंगों के परिधान को पहनना शुभ माना गया है।
सनातन परंपरा में केसरिया रंग को त्याग, शक्ति और अग्नि का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सूर्य देव से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति के दिन केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
लोक मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन केसरिया रंग के अलावा गुलाबी रंग पहनना भी बड़ा शुभ होता है। माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है और यह अच्छे भाग्य का संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गुलाबी रंग पहनने से श्रीकृष्ण और राधा रानी भी प्रसन्न होते हैं। यह रंग प्रेम, कोमलता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
लाल रंग को शुभता, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह रंग माता लक्ष्मी का आशीर्वाद दिलाने वाला होता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए मकर संक्रांति पर लाल रंग की साड़ी या सूट पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सुहाग और पारिवारिक सुख का प्रतीक है।
पीला रंग बृहस्पति ग्रह और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ज्योतिष के अनुसार गुरु ग्रह धर्म और अध्यात्म का कारक है। मकर संक्रांति पर पीले वस्त्र पहनने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है, मन सकारात्मक रहता है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
हरा रंग भगवान गणेश को प्रिय है और यह हरियाली व सुख-शांति का प्रतीक है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से गणपति और शिवजी दोनों की कृपा बनी रहती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
हिन्दू धर्म में काला रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है, लेकिन मकर संक्रांति पर मौसम और शनि की कृपा के कारण यह शुभ हो जाता है। महाराष्ट्र में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसा कहा जाता है कि यह त्योहार सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत का प्रतीक है।
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संक्रांति से एक दिन पहले और संक्रांति के दिन सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। काला रंग सूर्य की किरणों को ज्यादा अवशोषित करता है, जिससे शरीर को गर्माहट मिलती है। इस कारण प्राचीन काल से महाराष्ट्र में यह परंपरा चली आ रही है, जिसे लोग अभी भी निभाते हैं। यह व्यावहारिक कारण है, जो समय के साथ परंपरा बन गया।