बस 1 फैसला और जिंदगी बदल जाएगी, श्री प्रेमानंद जी महाराज का बड़ा संदेश

Premanand Ji Maharaj Talks: जीवन में प्रवचन सुनना और देना आसान है, लेकिन असली चुनौती है अपने तन, मन और प्राण को पूरी तरह भगवान को समर्पित करना। बहुत लोग कहते हैं कि वे समर्पित हैं।
Major Message from Shri Premanand Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
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Life Changing Spirituality Advice From Premanand Ji Maharaj: जीवन में प्रवचन सुनना और देना आसान है, लेकिन असली चुनौती है अपने तन, मन और प्राण को पूरी तरह भगवान को समर्पित करना। बहुत लोग कहते हैं कि वे समर्पित हैं, लेकिन मुश्किल समय आते ही उनका विश्वास डगमगा जाता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, इस माया के खेल में हमारा कोई नहीं है न बेटा, न बेटी, न परिवार। केवल एक ही सत्य है सच्चिदानंद, जो इस पूरी सृष्टि को चला रहा है।

एक तरफ दुनिया, दूसरी तरफ भगवान

प्रेमानंद जी महाराज कहते है कि हर इंसान के जीवन में एक सवाल बार-बार आता है क्या वह दुनिया (माया, पैसा, प्रतिष्ठा) को चुनेगा या भगवान और गुरु को? अधिकतर लोग दुनिया को चुन लेते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है। लेकिन जो व्यक्ति भगवान का साथ पकड़ लेता है, उसके लिए यही दुनिया बंधन नहीं, बल्कि मुक्ति का साधन बन जाती है।

समर्पण का असली मतलब

सच्चा समर्पण यह है कि "मेरा शरीर, मन और प्राण मुझसे ज्यादा मेरे भगवान के हैं।" जब यह भाव आ जाता है, तो इंसान मन की इच्छाओं से ऊपर उठ जाता है। अगर मन में अशांति या गलत विचार आते हैं, तो वह चिंता भी भगवान पर छोड़ देता है। बीमारी, दुख या अपमान कुछ भी हो, वह कहता है "यह शरीर मेरा नहीं, आपका है।"

राजा मोरध्वज और बलि से सीख

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को राजा मोरध्वज का उदाहरण देकर बताया कि सच्चा समर्पण क्या होता है। जब भगवान ने साधु बनकर उनसे बेटे का बलिदान मांगा, तो उन्होंने बिना आंसू बहाए इसे स्वीकार कर लिया। इसी तरह राजा बलि ने भी भगवान वामन के सामने सब कुछ खोकर भी अपना वचन निभाया। गुरु की चेतावनी के बावजूद उन्होंने अपना सिर तक अर्पित कर दिया। उनके इस त्याग से भगवान भी उनके सेवक बन गए।

जीवन की असली परीक्षा

आध्यात्मिक जीवन की परीक्षा लिखित नहीं होती, बल्कि परिस्थितियों के रूप में आती है:

  • कभी सुख और लालच के रूप में
  • कभी दुख, अपमान और कष्ट के रूप में

दोनों ही स्थितियों में जो भगवान के साथ खड़ा रहता है, वही सच्चा साधक होता है।

सब कुछ बदलने वाला अंतिम सत्य

यदि आप माया के अस्थायी सहारों को छोड़कर भगवान और गुरु का सहारा पकड़ लेते हैं, तो आपकी पूरी दुनिया बदल सकती है। एक सरल नियम अपनाएं "जो भी मेरा भगवान करता है, वही मुझे स्वीकार है।" याद रखें, यह दुनिया रस्सी में सांप की तरह भ्रम है। जब असली सत्य समझ में आ जाता है, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।

असली जीत समर्पण में है

जो व्यक्ति नश्वर चीजों को छोड़कर ईश्वर को अपना लेता है, वह सच्ची शांति और आनंद प्राप्त करता है। समर्पण ही वह रास्ता है, जो जीवन को साधारण से असाधारण बना सकता है।

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