भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
Mahashivratri Signs: 15 फरवरी 2026 को पूरे देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। जिसका शिव भक्तों को पूरे साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे।
हिन्दू लोक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि केवल व्रत और जागरण की रात नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और शिव-शक्ति से जुड़ने का विशेष अवसर मानी जाती है। शिव पुराण के अनुसार यह ध्यान और साधना की वह पावन रात्रि है, जब मन सबसे अधिक एकाग्र रहता है।
गरुड़ पुराण के स्वप्न अध्याय में भी उल्लेख मिलता है कि विशेष धार्मिक तिथियों पर मिले संकेत और सपने गहरी आध्यात्मिक चेतना से जुड़े हो सकते हैं। मान्यता है कि इस रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा अत्यंत सक्रिय रहती है, इसलिए इस दौरान मिलने वाले अनुभव साधारण नहीं माने जाते।
अगर महाशिवरात्रि की रात आपको इनमें से कोई संकेत मिले, तो इसे शिव कृपा का आशीर्वाद माना जाता है। जो इस प्रकार है-
ज्योतिषयों के अनुसार, यदि सपने में शिवलिंग, शिव मंदिर या जलाभिषेक का दृश्य दिखे, तो यह शुभ संकेत माना जाता है। यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और बाधाओं के दूर होने का संकेत हो सकता है।
नींद में या ध्यान के दौरान यदि मन में स्वतः शिव मंत्र गूंजने लगे, तो यह आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
ध्यान करते समय सफेद प्रकाश, दिव्य आभा या शांति का गहरा एहसास होना शुभ संकेत माना जाता है।
सपने में शिवलिंग देखने के अलावा, सर्प दिखना भी शिव की ऊर्जा और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। यह भय से मुक्ति और आत्मबल बढ़ने का संकेत हो सकता है।
यदि सपने में बिल्व पत्र, गंगाजल या त्रिशूल दिखाई दे, तो इसे विशेष शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि की रात बिना किसी कारण गहरी शांति या भक्ति भाव का जागना भी शिव कृपा का संकेत माना जाता है।
बिना अलार्म के ब्रह्म मुहूर्त में स्वयं जाग जाना और ध्यान की इच्छा होना भी सकारात्मक संकेत समझा जाता है।
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ये सभी संकेत आस्था और मान्यता पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य व्यक्ति को सकारात्मकता, आत्मचिंतन और भक्ति की ओर प्रेरित करना है।
महाशिवरात्रि की पावन रात को यदि मन में श्रद्धा, शांति और विश्वास जागे, तो यही सबसे बड़ा संकेत है कि शिव आपके साथ हैं।