लोहड़ी के त्यौहार से क्या संबंध है दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी का? जानिए असली कहानी

Dulla Bhatti Story: लोहड़ी सिर्फ फसल का त्योहार नहीं है, बल्कि यह दुल्ला भट्टी की बहादुरी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी याद दिलाने वाला एक लोक पर्व भी है। जानिए इस त्यौहार के बारे में।
Lohri Festival 2026
दुल्ला भट्टी की कहानी (सौ.सोशल मीडिया)
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Lohri Festival 2026: आज 13 जनवरी को पूरे देशभर में लोहड़ी का त्योहार उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। वैसे तो लोहड़ी पूरे भारत में मनाई जाती है लेकिन अगर इस पर्व की खास रौनक की बात करें तो वो पंजाब और हरियाणा में देखने को मिलती है।

इस दिन लोग आग जलाकर उसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं और लोहड़ी की पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और पॉपकॉर्न आदि अर्पित करते हैं। साथ ही लोहड़ी की आग को साक्षी मानकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं इस दौरान दुल्ला भट्टी की कहानी भी जरूर सुनी जाती है।

लोहड़ी केवल अग्नि, रेवड़ी और मूंगफली का त्योहार नहीं है, बल्कि यह साहस, न्याय और मानवीय मूल्यों की जीवंत कहानी भी है। पंजाब में लोहड़ी के गीतों में गूंजने वाला नाम दुल्ला भट्टी और उसके साथ जुड़ी सुंदरी–मुंदरी की कथा इस पर्व की आत्मा मानी जाती है।

कौन थे दुल्ला भट्टी?

दुल्ला भट्टी 16वीं शताब्दी में पंजाब के एक वीर और लोकप्रिय लोकनायक थे। उन्हें पंजाब का रॉबिन हुड भी कहा जाता है। कहा जाता है कि वे अन्याय, अत्याचार और ज़ुल्म के खिलाफ खड़े रहते थे। गरीबों, बेसहारा लोगों और खासकर महिलाओं की रक्षा करना उनका सबसे बड़ा धर्म था।

सुंदरी–मुंदरी की मार्मिक कथा

लोककथाओं के अनुसार, सुंदरी और मुंदरी दो अनाथ बहनें थीं। समाज में उस समय उन्हें अपमान और अन्याय का सामना करना पड़ रहा था। जब दुल्ला भट्टी को उनकी स्थिति का पता चला, तो उन्होंने इन दोनों बहनों को अपनी बेटियों की तरह अपनाया। दुल्ला भट्टी ने उनका सम्मानपूर्वक विवाह करवाया। लोकमान्यता के अनुसार, उनके पास दहेज देने के लिए धन नहीं था, इसलिए उन्होंने शगुन के रूप में शक्कर दी, जिसे आज लोहड़ी में अग्नि को अर्पित किया जाता है।

लोहड़ी गीतों में क्यों गाया जाता है दुल्ला भट्टी का नाम?

आज भी लोहड़ी के समय बच्चे और लोग गाते हैं— “सुंदर मुंदरिये हो! तेरा कौन विचारा? दुल्ला भट्टी वाला!” यह गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि दुल्ला भट्टी की वीरता, करुणा और सामाजिक न्याय का स्मरण है। यही कारण है कि उनके बिना लोहड़ी को अधूरा माना जाता है।

लोहड़ी और सामाजिक संदेश

दुल्ला भट्टी की कहानी लोहड़ी को एक गहरा अर्थ देती है—

  • नारी सम्मान
  • कमजोरों की रक्षा
  • अन्याय के विरुद्ध साहस
  • समाज में समानता और मानवीय संवेदना

क्यों अधूरी है लोहड़ी इस कथा के बिना?

लोहड़ी केवल फसल और ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि मानवता और परंपरा का उत्सव है। दुल्ला भट्टी और सुंदरी–मुंदरी की कहानी इसे आत्मा देती है। बिना इस कथा के लोहड़ी सिर्फ एक रस्म बनकर रह जाती है।

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