मंगलवार को पड़ रही है साल 2025 की अंतिम एकादशी, ज़रूर कर लें ये काम, बरसेगी भगवान की कृपा
Last Ekadashi 2025: साल 2025 की आखिरी एकादशी पर करें ये आसान उपाय। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें शुभ उपाय और नियम।
- Written By: सीमा कुमारी
साल 2025 की आखिरी एकादशी के दिन करें ये उपाय (सौ.सोशल मीडिया)
Putrada Ekadashi 2025: 30 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जा रहा है। जो कि साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। हिंदू धर्म में सभी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन प्रत्येक महीने की एकादशी तिथि को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।
यह शुभ एवं पावन तिथि जो सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना, दान-दक्षिणा और भजन-कीर्तन करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
ऐसे में इस दिन कुछ सरल उपाय करने से प्रभु प्रसन्न हो सकते हैं। साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटें, विवाह मार्ग बाधाएं और करियर में अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। ऐसे में आइए इन उपायों को जानते हैं।
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साल 2025 की आखिरी एकादशी के दिन करें ये उपाय:
संतान सुख के लिए उपाय
ज्योतिषयों के अनुसार, संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपति इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ में पूजा करें। पीले फूल, पीले वस्त्र और केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
विवाह में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए
कहा जाता है कि, जिन लोगों के विवाह में देरी या बाधाएं आ रही हैं, वे एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम या श्रीहरि के मंत्रों का जाप करें। साथ ही पीले वस्त्रों का दान करें।
करियर और नौकरी में सफलता के लिए
कार्यस्थल पर रुकावटें या प्रमोशन में अड़चन हो तो एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए
धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए पुत्रदा एकादशी पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
पुत्रदा एकादशी व्रत से जुड़े नियम
- इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करें
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- दिनभर सात्विक आचरण रखें
- झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
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ये है पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 5:24 से 06:19
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 5:51 से 07:13
अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:3 से 12:44
विजय मुहूर्त- दोपहर में 2:07 से 02:49
निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:51
