Kojagari Lakshmi Puja: बंगाल में दिवाली से पहले ऐसे होती है मां लक्ष्मी की पूजा, अल्पना से सजाया जाता है घर

Sharad Purnima Puja: बंगाल में कोजागरी पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ बनाई जाती है खास अल्पना, चढ़ाया जाता है खास भोग। जानें इस त्योहार की खास परंपराएं।
Kojagari lakshmi puja bengal alpana bhog traditions.
कोजागरी लक्ष्मी पूजाफोटो.सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • बंगाल में दिवाली से पहले मनाई जाती है कोजागरी लक्ष्मी पूजा।

  • इस दिन घरों में मां लक्ष्मी की पूजा के साथ अल्पना बनाने की परंपरा है।

  • मां लक्ष्मी नारियल-गुड़ के लड्डू, खीर और दूसरे पकवानों का भोग लगाया जाता है।

Kojagari Lakshmi Puja 2026: दिवाली पर देश के ज्यादातर हिस्सों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में लक्ष्मी पूजा की एक खास परंपरा है। यहां दुर्गा पूजा के कुछ दिन बाद अश्विन महीने की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा पर कोजागरी लक्ष्मी पूजा मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को है। बंगाली परिवारों में इस दिन घर की सफाई, अल्पना बनाने, मां लक्ष्मी को भोग चढ़ाने और रात में पूजा करने की परंपरा है।

क्या है कोजागरी लक्ष्मी पूजा?

कोजागरी नाम को संस्कृत के ‘को जागर्ति’ यानी ‘कौन जाग रहा है?’ से जोड़ा जाता है। पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी जागने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के चलते कई परिवार रात में पूजा करते हैं और भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं।

मां लक्ष्मी को घर की सुख-समृद्धि और अन्न की देवी के रूप में भी देखा जाता है। इसलिए पूजा में धान की बालियां और दूसरी पारंपरिक सामग्री को शामिल किया जाता है।

अल्पना से सजाया जाता है घर और पूजा स्थल

कोजागरी लक्ष्मी पूजा में बंगाली घरों के प्रवेश द्वार और पूजा स्थल पर अल्पना बनाने की परंपरा है। यह चावल के घोल से जमीन पर बनाई जाने वाली पारंपरिक लोककला है। इसमें कमल के फूल, गोलाकार आकृतियां और मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाए जाते हैं। कई घरों में प्रवेश द्वार से पूजा स्थल तक पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिन्हें देवी के घर में आगमन का प्रतीक माना जाता है। सफेद रंग की अल्पना के साथ फूल और मिट्टी के दीये सजावट को खास बनाते हैं।

मां लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है खास भोग

कोजगारी पूजा में खिचड़ी, लूची, नारियल के लड्डू, खीर या पायेश, फल और मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं। कुछ घरों में चिउड़ा, खई और मुरकी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी प्रसाद में शामिल किए जाते हैं।

Kojagari lakshmi puja bengal alpana bhog traditions.
Kartik Snan 2026: कार्तिक माह में स्नान और दान का क्या है महत्व? जानिए इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

रात में पूजा और लक्ष्मी पांचाली का पाठ

कोजागरी पूजा में मां लक्ष्मी की प्रतिमा, तस्वीर या पारंपरिक चित्रित मिट्टी की सरी स्थापित करके पूजा की जाती है। पूजा के अंत में लक्ष्मी पांचाली का पाठ किया जाता है। कई परिवारों में रात में जागकर भजन-कीर्तन भी किया जाता है।

Navbharat Live
navbharatlive.com