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जानिए श्राद्ध पूजन में कौन से फूल का होता है उपयोग, तुलसी और भृंगराज की है मनाही

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बड़ा महत्व है। यह समय पितरों को समर्पित है। कहते हैं कि इन 16 दिनों में पितर स्वर्ग से धरती पर वंशजों के बीच आते हैं और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध कर्म से प्रसन्न होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Sep 17, 2024 | 07:31 AM

जानिए श्राद्ध पूजन में कौन से फूल का होता है उपयोग, तुलसी और भृंगराज की है मनाही

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सनातन धर्म में ‘पितृ पक्ष'(Pitru Paksha 2024) को बहुत अहम माना जाता है। यह समय पितरों को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 17 सितंबर भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होने जा रही है। 16 दिवसीय पितृ पक्ष का समापन 2 अक्टूबर के दिन होगा।

कहते हैं कि इन 16 दिनों में पितर स्वर्ग से धरती पर वंशजों के बीच आते हैं और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध कर्म से प्रसन्न होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि किया जाता है, लेकिन इस दौरान एक विशेष फूल का इस्तेमाल किया जाता है, अगर इस फूल का इस्तेमाल न किया जाए, तो श्राद्ध कर्म पूरा नहीं माना जाता।

आपको बता दें कि इस फूल का नाम है काश का फूल। ऐसे में आइए जानें पितरों के श्राद्ध में काश के फूलों का महत्व और इस दौरान किन फूलों का इस्तेमाल किया जाता है-

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पितृपक्ष में इस फूल का उपयोग आवश्यक

* ज्योतिषयों के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पूजा में काश के फूल का विशेष महत्व होता है।

*  काश का फूल सफेद रंग का होता है, जो पवित्रता, शांति, और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है।

* इसे पितरों की तृप्ति और शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका उपयोग पिंडदान और तर्पण के समय किया जाता है।

* मान्यता है कि, काश के फूल से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं।

* यह फूल नदी किनारे या जलाशयों के पास उगता है, जो इसे प्राकृतिक पवित्रता का प्रतीक बनाता है।

* कहते हैं, श्राद्ध की पूजा अन्य पूजा से काफी अलग होती है। इतना ही नहीं, श्राद्ध कर्म के दौरान कुछ चीजों का खास ख्याल रखा जाता है।

*  पितृ पक्ष में हर फूल को श्राद्ध और तर्पण में शामिल नहीं किया जा सकता।

इसके लिए सिर्फ काश के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि पितृ पक्ष में श्राद्ध-पूजन में मालती, जूही, चम्पा सहित सफेद फूलों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ ही, इस बात का भी खास ख्याल रखें कि इस दौरान तुलसी और भृंगराज का भी इस्तेमाल भूलकर न करें।

कई पुराणों में इस बात का जिक् मिलता है कि पितृ तर्पण के दौरान काश के फूल का ही इस्तेमाल शुभ माना गया है। जिस तरह तर्पण के दौरान कुश और तिल का खास प्रयोग किया जाता है, उसी प्रकार पितृ तर्पण में काश के फूल का होना आवश्यक है। कहते हैं कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए काश के फूलों का प्रयोग शुभ माना गया है।

Know which flowers are used in shraddha puja tulsi and bhringraj are prohibited

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Published On: Sep 17, 2024 | 05:36 AM

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