महाकुंभ में नागा साधु का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Mahakumbh 2025: जैसा कि, हम जानते हैं देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ का आगाज आने वाले साल 2025 में होने जा रहा है। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में कुंभ के लिए कड़ी तैयारियां हो गई है। यहां पर महाकुंभ में जिस तरह से श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है वहीं पर यहां पर नागा साधु और सन्यांसी अपनी अर्जी लगाने के लिए पहुंच रहे है।
कुंभ मेले में आने वाले नागा साधुओं का जीवन और शैली सामान्य लोगों से बड़ी अलग होती है। यहां पर आज हम नागा साधुओं के जीवन शैली के बारे में बात करेंगे जो बिल्कुल ही हैरान कर देने वाली है।
यहां पर महाकुंभ की शान कहे जाने वाले नागा साधुओं की बात की जाए तो, भगवान को पाने के लिए नागा रूप को धारण करते हैं। नागा साधु हिंदू धर्मावलंबी ( धर्म का आश्रय लेनेवाला) सन्यासी हैं, जो नग्न रहने तथा युद्ध कला में माहिर होते हैं। नागा सन्यासी विभिन्न अखाड़ों में रहते हैं। दरअसल नागा साधुओं के अखाड़ों में रहने के लिए आदि गुरु शंकराचार्य ने परंपरा की शुरुआत की है।
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यहां पर नागा साधुओं के रहने का भी विशेष स्थान होता है। नागा साधुओं का आश्रम हरिद्वार और देश के विभिन्न जगहों पर हैं। इन जगहों पर ये अपना जीवन बहुत ही कठोरता और अनुशासन में जीते हैं। इतना ही नहीं तपस्या में रहने वाले ये साधु गुस्से वाले भी होते है दरअसल ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं लेकिन अग्नि के प्रतीक माने जाते है।
यहां पर महाकुंभ के खास कहे जाने नागा साधुओं को भारतीय सेना की तरह माना जाता है। नागा साधु एक सैन्य पंथ है और एक सैन्य रेजीमेंट की तरह बंटे हुए हैं। नागा साधु अपने सैन्य त्रिशूल, तलवार, शंख और चिलम से दर्शाते हैं। इतना ही नहीं खुद को ध्यान मग्न रखने के लिए तीन प्रकार के योग करते है कहते हैं इन योगों से उन्हें ठंडी से राहत मिलती है।
यहां पर बताते चलें कि, नागा साधु को खास तौर पर भगवान शिव के भक्त के तौर पर जाना जाता है। जिन्हें दिगंबर भी कहा जाता है। इनके पूरे शरीर पर धूनी की राख लपेटे होते हैं। ये लोग कुंभ के मेले में शाही स्नान के समय खुलकर श्रद्धालुओं के सामने आते हैं। नागा साधु की स्टाइल से प्रभावित विदेशी पर्यटक होते हैं जो हर साल महाकुंभ में नागा साधुओं की जीवनशैली को परखने और कुंभ के लिए पहुंचते है।
अघोरी जहां तंत्र साधना करते हैं और एकांत में रहते है। वहीं नागा साधु मंत्र साधना और योग करते हैं और सामाजिक स्तर पर काफी सक्रिय रहते हैं। धर्म की रक्षा के लिए नागा साधु प्रतिबद्ध रहते हैं और समय आने पर युद्ध तक करने के लिए तैयार होते हैं। इन्हें युद्ध कला में पारंगत माना जाता है।