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शिवलिंग में शिव-पार्वती के साथ उनके बेटे और बेटी का भी है वास, जानिए विशेष फल हेतु पूजा की विधि

सावन के महीने में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जा रही है जो दिन शिवलिंग पर केवल शिव जी का ही नहीं बल्कि, अलग-अलग हिस्सों पर बेटी अशोक सुंदरी, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय का भी निवास होता है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Jul 26, 2024 | 08:15 AM

जानें अशोक सुंदरी पूजा का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)

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शिव भक्तों का महापर्व सावन का महीना 22 जुलाई से 19 अगस्त तक रहने वाला है। इस बार श्रावण में 5 सावन सोमवार व्रत है, जिसकी वजह से भी सावन का महीना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसा माना जाता है कि सावन सोमवार पर सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिषियों के अनुसार, शिवलिंग पर केवल शिव जी का ही नहीं बल्कि, अलग-अलग हिस्सों पर बेटी अशोक सुंदरी, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय का भी निवास होता है। ऐसे में आइए जानें भगवान शिव और पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी की पूजा सोमवार को क्यों की जाती है,

कहा होता है अशोक सुंदरी का वास

ज्योतिषियों के अनुसार, शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय जिस नलिका से जल बाहर निकलता है, उसी स्थान पर अशोक सुंदरी का वास माना जाता है। शिव जी की पूजा के साथ-साथ अशोक सुंदरी की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। अशोक सुंदरी की पूजा के लिए भी सोमवार का दिन ही सबसे बेहतर माना गया है।

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कैसे करें अशोक सुंदरी की पूजा

सोमवार के दिन सबसे पहले शुद्ध जल में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं और इसके बाद अशोक सुंदरी पर जल अर्पित करें। अब शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाने के बाद अशोक सुंदरी के स्थान पर चंदन का तिलक लगांए। अब शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल माला आदि अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इसके बाद अशोक सुंदरी का ध्यान करते हुए उन्हें अपनी मनोकामना कहें। ऐसा करने से व्यक्ति की इच्छा जल्द पूरी होती है।

शिवलिंग के साथ-साथ अशोक सुंदरी पर भी फूल अर्पित करें। आप शिवलिंग के साथ-साथ अशोक सुंदरी पर भी बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति के लिए धन लाभ के योग बनने लगते हैं और व्यापार में भी फायदा देखने को मिलता है।

शिव पुराण के अनुसार, जलाधारी के आगे की ओर जो पद चिन्ह नजर आते हैं, उस स्थान पर कार्तिक और गणेश जी का वास माना जाता है। ऐसे में शिवलिंग पर जल चढ़ाते के बाद इस स्थान पर दोनों ओर 5 से 7 बार अपने हाथों से इस प्रकार दबाना चाहिए जैसे आप किसी के पैर दबा रहे हैं। इस दौरान श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही यदि आपकी संतान को कोई बीमारी या समस्या है, तो उससे भी राहत मिल सकती है।

लेखिका- सीमा कुमारी

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Published On: Jul 26, 2024 | 08:15 AM

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