‘जितिया व्रत’ से पहले मछली और मड़ुआ की रोटी खाने की है परंपरा, इसके पीछे क्या है वैज्ञानिक कारण
उतर भारत में मनाए जाने वाले जितिया को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास करती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
'जितिया व्रत' से पहले मछली और मड़ुआ की रोटी खाने की परंपरा का वैज्ञानिक कारण जानिए
Jitiya Vrat 2024 : संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला ‘जीवित्पुत्रिका’ व्रत इस वर्ष 25 सितंबर, बुधवार को उतर भारत सहित विभिन्न राज्यों में मनाया जाएगा। जितिया व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, समृद्धि और उन्नत जीवन के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आपको बता दें, इस व्रत को रखने से एक दिन पहले महिलाएं नहाय खाय करती हैं। नहाय खाय में मडूआ की रोटी और मछली खाने की परंपरा है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस खबर में आज हम बताएंगे इससे सेहत को होने वाले फायदे के बारे में।
व्रत से पहले मडूआ यानी रागी की रोटी खाने के फायदे
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व्रत का तनाव होता है कम
डायीटिशियन के अनुसार, कुछ महिलाओं को काफी ज्यादा तनाव होता है। उन्हें इस बात का डर बना होता है कि उनका व्रत सफल होगा कैसे होगा। कहीं, उन्हें कुछ समस्या न हो जाए। किसी कारण से व्रत न टूट जाए।
ऐसे स्थिति में रागी की रोटी आपके लिए काफी लाभकारी हो सकती है। दरअसल, रागी में भरपूर रूप से एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होता है, जो तनाव को कम करने में आपकी मदद करता है। इससे एंग्जायटी और डिप्रेशन को कम किया जा सकता है।
शरीर में बनी रहती है उर्जा
बता दें, रागी आयरन का अच्छा सोर्स होता है। इसके सेवन से आपका ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। अगर आप व्रत से पहले रागी की रोटी का सेवन करते हैं, तो इससे आपका शरीर एनर्जी से भरपूर होता है। साथ ही शरीर में अन्य पोषक तत्वों की कमी महसूस नहीं होती है।
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शरीर में प्रोटीन की नहीं होती कमी
कुछ क्षेत्रों में रागी की रोटी के साथ मछली खाने की भी परंपरा होती है। मछली प्रोटीन और सोडियम का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। व्रत से पहले मछली का सेवन करने से पहले शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती है। साथ ही सोडियम आपको डिहाइड्रेशन से बचाने में आपकी मदद करता है।
वॉटर को शरीर में करता है स्टोर
रागी की रोटी में वॉटर को अब्शॉर्व करने की क्षमता होती है। जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। ऐसे में जब आप निर्जला व्रत करते हैं, तो आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होती है।
