अगर वट सावित्री व्रत के दौरान अचानक आ जाए पीरियड्स, तो जानिए पूजा के लिए क्या कहते हैं नियम
वट सावित्री व्रत के दौरान पीरियड्स या माहवारी आ जाती है। कई लोग इस स्थिति में पूजा करने से मना करते है तो अगर ऐसा हो जाए तो इन महिलाओं को व्रत के दौरान कौन से नियम अपनाने होंगे जानने जरूरी है।
- Written By: दीपिका पाल
वट सावित्री व्रत (सौ. सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार का महत्व होता है जिसमें ही 26 मई को वट सावित्री का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। व्रत के दौरान महिलाएं 16 श्रृंगार में विधि-विधान के साथ पूजा करती है। व्रत के दौरान तन और मन का शुद्ध होना जितना जरूरी होता है उतना ही नियम मानने जरूरी होते है।
कई बार ऐसी स्थिति बनती है कि व्रत के दौरान पीरियड्स या माहवारी आ जाती है। कई लोग इस स्थिति में पूजा करने से मना करते है तो अगर ऐसा हो जाए तो इन महिलाओं को व्रत के दौरान कौन से नियम अपनाने होंगे जहां पर व्रत का संकल्प पूरा हो जाएं और व्रत भी नहीं टूटे। चलिए जान लेते हैं वट सावित्री व्रत के इस नियम के बारे में…
क्या कहते हैं इसके धार्मिक और आधुनिक दृष्टिकोण
आपको बताते चलें कि, यहां पर पौराणिक काल के अनुसार इस व्रत को लेकर नियम दिए गए है। यहां पर इसके धार्मिक दृष्टिकोण की बात की जाए तो, प्राचीन काल में मासिक धर्म को “अशुद्धता” से संबंधित किया जाता था, जिसके कारण महिलाओं को पूजा-पाठ, मंदिर में प्रवेश और व्रत आदि से दूर रहने की सलाह दी जाती थी। इस प्रकार की राय के बारे में वैसे तो कहीं परंपरा में नहीं बताया गया है। इसे लेकर आधुनिक दृष्टिकोण में बताया गया कि, माहवारी एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, न कि कोई अशुद्धता. इसलिए, यदि कोई महिला पीरियड्स के दौरान उपवास रखना चाहती है, तो उसे ऐसा करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
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पति की जिंदगी जीत लाती है सुहागिन महिलाएं
बता दें कि इस व्रत को पहले माता पार्वती ने आरंभ किया था और तब से सभी सुहागन व्रत को करती है। इस व्रत के प्रभाव इतना है कि सुहागिन महिलाएं मृत्यु के सईया से भी अपने पति को वापस ले आती हैं, सभी सुहागिन व्रत को इसलिए करती है ताकि उनके पति के ऊपर आने वाले किसी भी संकट से बचा जा सके।वट सावित्री की पूजा में सुहागिन वट के पेड़ के चारों ओर कलावा बांध कर चक्कर लगाती है, फिर गौरी (पार्वती) माता की पूजा करती है. गीत संगीत भजन कर पूजा करती।
जानिए क्या होते हैं नियम
आपको बताते चलें कि, अगर व्रत सावित्री के दौरान पीरियड्स आ जाए तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए। यहां पर नियम कहते हैं कि, पीरियड्स होने पर भी आप वट सावित्री का व्रत रख सकती है। इसके अनुसार, सुहागिन महिलाएं वट सावित्री के दिन सुबह स्नान करके सोलह सिंगार कर भगवान को प्रणाम करना चाहिए। इसके अलावा यह ध्यान रखना चाहिए की पूजा की सामग्री को बिल्कुल भी न छुए बल्कि पूजा के सभी सामग्री को किसी और सुहागिन महिला को दे दिया जाए , उनके बदले दूसरी सुहागन स्त्री पूजा कर देंगे साथी उनके साथ आप कथा सुन सकते हैं।
