कितने तीर खाने के बाद हुआ रावण का अंत, जानिए विजयादशमी पर ये खास तथ्य
दशहरा का पर्व इस बात की याद दिलाता है कि, अधर्म या अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हो जीत हमेशा धर्म और सत्य की ही होती है। क्या आप जानते हैं कितने तीर लगने के बाद रावण का अंत हुआ था।
- Written By: दीपिका पाल
दशहरा (सोशल मीडिया)
Dusshera 2024: आज देशभर में दशहरा का त्योहार मनाया जा रहा हैं जो बुराई पर अच्छाई यानि अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक होती है। जिस तरह से भगवान श्रीराम ने अधर्म कर रहे रावण का अंत कर अच्छाई को जीता था वैसे ही दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। दशहरा का पर्व इस बात की याद दिलाता है कि, अधर्म या अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हो जीत हमेशा धर्म और सत्य की ही होती है। क्या आप जानते हैं कितने तीर लगने के बाद रावण का अंत हुआ था।
रावण को कई नामों से है जानते
लंकापति रावण और भगवान श्रीराम के बीच का युद्ध दशहरा की याद दिलाता है। रावण को धार्मिक ग्रंथों में अत्यंत दुराचारी, असुर , दैत्य, अत्याचारी कहा जाता है इसके अलावा रावण प्रकांड पंडित, महाज्ञानी, राजनीतिज्ञ, महाप्रतापी, पराक्रमी योद्धा, विद्धान, शिवभक्त और एक महान योद्धा भी थी, जिसे पराजित करना सभी के लिए लगभग असंभव था लेकिन शायद भगवान श्रीराम के हाथों ही रावण का अंत होना तय था इसलिए तीर लगने के बाद रावण का अंत हो गया।
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बस एक 1 तीर बना रावण के लिए काल
श्रीरामचरितमानस में जैसा कि वर्णित है, अधर्मी रावण का अंत भगवान राम के तीर हुआ था। इसके अलावा भगवान राम ने रावण को मारने के लिए 31 बाण चलाए थे. इन 31 बाणों में 1 बाण रावण के नाभि पर लगा था, 10 बाण से उसके 10 सिर अलग हुए और 20 बाण से उसके हाथ धड़ से अलग हुए थे. कहा जाता है कि जब रावण का विशाल धड़ पृथ्वी पर गिरा था तो पृथ्वी डगमगाने लगी थी। उस दौरान श्रीराम ने रावण को दिव्य अस्त्र से मारा था, जिसे ब्रह्मा देव ने रावण को ही दिया था।
हनुमान जी रावण के इस अस्त्र को लंका से लेकर आए थे और विभीषण ने रामजी को बताया था कि रावण की नाभि पर वार करने से ही उसका अंत होगा, क्योंकि रावण की नाभि में अमृत है. तब भगवान राम ने रावण की नाभि पर तीर चलाया, जिससे रावण का अंत हुआ। इसके बाद ही विजयादशमी का त्योहार मनाने की परंपरा शुरु हुई है। इसके साथ हर साल दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।
