Ketu Astrology: क्या कुंडली के प्रथम भाव में केतु होना अशुभ होता है? जानें ज्योतिष में इसका प्रभाव और उपाय
Ketu Effect In Astrology: प्रथम भाव में केतु से होने का मतलब है कि प्रथम भाव में केतु यह दर्शाता है कि सफलता और धन प्राप्त करने के लिए जातक को अपनी क्षमता और सीमा से परे जाकर प्रयास करना होगा।
- Written By: रीता राय सागर
केतु प्रभाव (फोटो.सोशल मीडिया)
Ketu In First House Effects: कुंडली में राहु-केतु को अशुभ फल देने वाला माना जाता है, लेकिन केतु ग्रह ज्योतिष में एक छाया ग्रह है जो वैराग्य, आध्यात्मिकता, ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक है। दूसरी ओर, पहला भाव यानी लग्न व्यक्ति के व्यक्तित्व, आत्म-चेतना और शारीरिक बनावट का कारक होता है।
जब केतु पहले भाव में होता है, तो यह व्यक्ति के जीवन पर रहस्यमयी ढंग से गहरा प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति अच्छे और बुरे दोनों परिणाम दे सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति के कुंडली में अन्य ग्रहों की दशा कैसी है।
केतु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष पड़ता है। ज्योतिष में केतु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि केतु कुंडली में मजबूत होता है, तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमजोर होने पर यह अशुभ फल देता है।
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व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है
- व्यक्ति का स्वभाव रहस्यमयी और विचारशील हो सकता है।
- सेल्फ कॉन्फिडेंस का कम होना और अकेलापन अधिक महसूस होता है।
- ऐसे व्यक्ति अपने जीवन के गहरे अर्थ को समझने और आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहता हैं।
- कभी-कभी यह स्थिति मानसिक अस्थिरता, भ्रम या आत्म-संदेह भी उत्पन्न कर सकती है।
- व्यक्ति कम दोस्त बनाना पसंद करता है।
- परिवार के साथ भावनात्मक दूरी।
- वैवाहिक जीवन में कठिनाई।
- सिरदर्द, त्वचा रोग मिर्गी, या मानसिक अशांति जैसी समस्याएं।
केतु के पहले भाव के प्रभाव से बचने के उपाय
- प्रथम भाव में स्थित केतु के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए माथे, नाभि और गर्दन पर केसरिया तिलक लगाना चाहिए।
- अनामिका या छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी पहननी चाहिए।
- गरीबों में या मंदिर में प्रतिवर्ष काले और नीले रंग के कंबल दान करें।
- व्यक्ति को हर महीने ब्राह्मणों या पुजारियों को भोजन कराना चाहिए।
- बुधवार और शनिवार को कौआं, कुत्ता और गाय को चारा खिलाएं।
- काले और सफेद रंग के कुत्तों को प्रतिदिन खाना खिलाएं। वे आवारा या पालतू हो सकते हैं।
- प्रतिदिन सुबह भगवान गणेश के मंदिर में लड्डू अर्पित करें। इससे आपकी कुंडली के प्रथम भाव में केतु के बुरे प्रभाव दूर हो जाएंगे।
इन मंत्रों का करें जाप
केतु का बीज मंत्र:
ॐ कें केतवे नमः
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में 108 बार इस मंत्र का जाप करने से केतु का प्रभाव कम होता है।
