बुधवार को है ‘करमा पूजा, जानिए कहां मनाया जाता है यह त्योहार और क्या है इसका महत्व
Karam Puja: करमा पूजा इस वर्ष 3 सितंबर, बुधवार को मनाई जा रही हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, इस दिन वृक्षों, फसलों और करम देवता की पूजा करके प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है करमा पूजा (सौ.सोशल मीडिया)
Karam Puja Kab Hai 2025: ‘करमा पूजा’ झारखंड के प्रमुख त्योहारों में से एक है। जो हर साल भाद्रमाह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। आपको बता दें, इस त्योहार की धूम झारखंड सहित ओडिशा, बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम में खूब देखी जाती है। इस त्योहार को आदिवासी समाज के लोग बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस साल यह त्योहार 3 सितंबर, बुधवार को मनाया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाई-बहन के अटूट रिश्ते में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा अनुसार, करमा धरमा कथा का पाठ, जावा विधि, और भाई दूज जैसे अनुष्ठान इस दिन किए जाते है। इस दिन प्रकृति और पेड़ों की पूजा करके भूमि की समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
यह त्योहार किसानों और आदिवासी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। पूजा के दौरान फसलों, घर और आंगन को सजाया जाता है और भाई-बहन के बीच प्रेम और सम्मान की भावना को बढ़ावा दिया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं ‘करमा पूजा’ कब है और इससे जुडी कुछ रोचक बातें :
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कब है करमा पूजा
आपको बता दें, करमा पूजा 2025 इस वर्ष 3 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में मनाया जाता है। इसे भाई-बहन के अटूट प्रेम, प्रकृति पूजा और फसलों की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कैसे मनाया जाता है करमा पर्व
आपको बता दें, झारखंड का लोकप्रिय पर्व करमा पूजा के दिन लड़कियां व्रत करती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर घर की साफ-सफाई की जाती है। फिर आंगन में विधिपूर्वक करम डाली को गाड़ा जाता है।
इसके बाद उस स्थान को गोबर से लीपकर शुद्ध किया जाता है। करमा पर्व के दिन बहने हाथ में टोकरी या थाली लेकर पूजा के लिए आंगन में उस स्थान पर बैठती हैं जहां करम डाली को गाड़ा गया है।
परंपरा अनुसार,इस दौरान करमा या करम राजा की पूजा की जाती है और बहनें प्रार्थना करती हैं कि उनके भाई को जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां मिलें। भाई के मन में कभी कोई गलत विचार न आए और वह गलत रास्ते पर न जाए। यह पूजा गांव के बुजुर्ग कराते हैं और पूजा के बाद करम कथा भी सुनाई जाती है।
करमा पर्व का क्या धार्मिक महत्व
करमा पर्व झारखंड का एक लोकप्रिय पर्व है और वहां के लोग पूरे साल इस पर्व का काफी बेसब्री से इंतजार करते हैं। करमा पूजा का महत्व कई दृष्टियों से समझा जा सकता है। यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन बनाए रखना जीवन में वास्तविक सुख और समृद्धि पाने का मार्ग है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी जीविका, खुशहाली और कल्याण सीधे धरती माता और उसकी उपज से जुड़ी है।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, इस दिन वृक्षों, फसलों और करम देवता की पूजा करके प्रकृति के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाता है। साथ ही, भाई-बहन के प्रेम और परिवार में सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
जिस तरह रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। बिल्कुल उसी प्रकार करमा पर्व भाई -बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता हैं। इस दिन बहनें पूरे दिन व्रत कर करमा देवता की पूजा करती है और उनसे अपनी भाई की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि का वरदान मांगती हैं।
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करमा पर्व झारखंड का एक लोकप्रिय पर्व है और वहां के लोग पूरे साल इस पर्व का काफी बेसब्री से इंतजार करते हैं। जिस तरह रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। बिल्कुल उसी प्रकार करमा पर्व भाई -बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता हैं।
इस दिन बहनें पूरे दिन व्रत कर करमा देवता की पूजा करती है और उनसे अपनी भाई की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि का वरदान मांगती हैं।
