कलावा बांधने का सही तरीका क्या है? जानिए हाथ में मौली कितनी बार लपेटना माना जाता है शुभ
Kalawa Bandhne Ke Niyam Vidhi: हिंदू धर्म में कलावा को शुभता, सुरक्षा और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथ में मौली कितनी बार लपेटनी चाहिए। यहां जानिए।
- Written By: सीमा कुमारी
रक्षा सूत्र बांधने के क्या हैं धार्मिक नियम (सौ.सोशल मीडिया)
Kalawa Bandhne Ka Sahi Tareeka Aur Mahatva: सनातन धर्म में पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्यों के दौरान हाथ में कलावा या मौली बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि शुभता, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक अनुष्ठानों के समय पंडित या पुरोहित मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मौली को हाथ में कितनी बार लपेटना चाहिए- 3 बार, 5 बार या 7 बार? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और जरूरी नियमों के बारे में।
रक्षा सूत्र बांधने के क्या हैं धार्मिक नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा या रक्षा सूत्र बांधने की एक विशेष विधि होती है। इसे श्रद्धा और मंत्रोच्चार के साथ बांधा जाता है। माना जाता है कि सही विधि से धारण किया गया रक्षा सूत्र व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और शुभ फल प्रदान करने में सहायक होता है।
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मौली को हाथ में कितनी बार लपेटना माना जाता है शुभ?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रक्षा सूत्र को सामान्य तौर पर 3 या 5 बार लपेटकर बांधना शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के दौरान अधिकांश पंडित और पुरोहित इसी विधि का पालन करते हैं।
हालांकि कुछ लोग अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इसे अधिक बार भी लपेटते हैं, लेकिन शास्त्रीय मान्यताओं में 3 और 5 बार मौली बांधने का विशेष महत्व बताया गया है।
तीन बार रक्षा सूत्र बांधने का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यता है कि रक्षा सूत्र को तीन बार लपेटने का संबंध त्रिदेव और त्रिशक्तियों से होता है।
हिंदू धर्म में त्रिदेव के रूप में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश को माना जाता है, जबकि त्रिशक्तियों में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां दुर्गा का विशेष स्थान है।
माना जाता है कि तीन बार रक्षा सूत्र बांधना इन दिव्य शक्तियों के आशीर्वाद, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक होता है। यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल की कामना से जुड़ा माना जाता है।
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पुरुष, महिलाएं और लड़कियां किस हाथ में बांधें कलावा?
- पुरुषों के लिए: रक्षा सूत्र दाहिने हाथ में बांधने की परंपरा है।
- विवाहित महिलाओं के लिए: बाएं हाथ में मौली बांधना शुभ माना जाता है।
- अविवाहित लड़कियों के लिए : दाहिने हाथ में कलावा धारण किया जा सकता है।
रक्षा सूत्र बांधते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- मौली बांधते समय हाथ की मुट्ठी बंद रखना शुभ माना जाता है।
- रक्षा सूत्र को मंत्रोच्चार के साथ बांधने की परंपरा है।
- कलावा बंधवाने के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार पंडित या पुरोहित को दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।
- रक्षा सूत्र को हमेशा सम्मान और श्रद्धा के साथ धारण करना चाहिए।
रक्षा सूत्र सिर्फ धागा नहीं, आस्था का प्रतीक है
सनातन परंपरा में कलावा या मौली को सुरक्षा, मंगल और ईश्वर की कृपा का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि आज भी पूजा-पाठ से लेकर हर शुभ कार्य में इसे धारण करने की परंपरा बड़े श्रद्धाभाव के साथ निभाई जाती है।
