8th House in Astrology: आठवें भाव में कौन सा ग्रह होता है सबसे शुभ? जानें शुक्र-शनि समेत सभी ग्रहों का असर
8th House Planet: ज्योतिष में कुंडली के आठवें घर में कौन सा ग्रह शुभ माना जाता है, इसे लेकर हमेशा से रहस्य रहा है। जानें आठवें भाव में ग्रहों के प्रभाव। धन, करियर और जीवन में बदलाव से जुड़े संकेत।
- Written By: रीता राय सागर
फोटो.सोशल मीडिया
Eighth House Astrology: ज्योतिष में कुंडली का आठवां भाव सबसे रहस्यमय और गहरे भावों में गिना जाता है। इसे आयु, जीवन में बदलाव, विरासत, साझा धन, ससुराल, गुप्त बातें, अंतरंगता और जीवन में बड़े परिवर्तन से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि आठवें भाव में ग्रहों की स्थिति को लेकर अक्सर सवाल होता है कि यहां कौन सा ग्रह सबसे शुभ माना जाता है।
हालांकि इसका जवाब हर कुंडली के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। ग्रह की स्थिति के साथ उसकी राशि, ग्रहबल, युति और दृष्टि को भी देखा जाता है।
आठवां भाव किस चीज का कारक है?
वैदिक ज्योतिष में आठवें भाव को अष्टम भाव या रंध्र भाव कहा जाता है। इसे पारंपरिक रूप से दुष्ट भाव माना गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह हमेशा नकारात्मक परिणाम देता है।
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आठवां भाव उन बदलावों से जुड़ा माना जाता है, जिन्हें व्यक्ति हमेशा नियंत्रित नहीं कर सकता। अचानक लाभ या नुकसान, दुर्घटना, बीमारी, ऑपरेशन, विरासत, बीमा, साझा धन और ससुराल पक्ष से जुड़े विषयों को इससे जोड़ा जाता है। बता दें कि पश्चिमी ज्योतिष में भी आठवें घर को बदलाव, अंतरंगता, धन संपत्ति, पैतृक संपत्ति और मानसिक गहराई से जोड़ा जाता है।
आठवें भाव में कौन सा ग्रह सबसे अच्छा है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, आठवें भाव के कारक ग्रह के रूप में शनि को विशेष रूप से जोड़ा जाता है। शनि आयु, कर्म, जिम्मेदारी और जीवन के कठिन अनुभवों का संकेतक माना जाता है। आठवें घर में शुभ परिणाम के लिए कोई एक ग्रह नहीं है। मजबूत और शुभ ग्रह माने जाने वाले बृहस्पति को कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में कठिन परिस्थितियों में संरक्षण, ज्ञान और साझा धन से जुड़े सकारात्मक परिणामों से जोड़ा जाता है। शुक्र ग्रह भी रिश्तों, साझेदारी और साथी से संबंधित हो सकता है। इसलिए शनि को अष्टम भाव का प्रमुख कारक और गुरु को संभावित शुभ प्रभाव देने वाला ग्रह समझना माना जा सकता है।
आठवें भाव में शनि का प्रभाव
आठवें भाव में शनि के होने से व्यक्ति को गंभीर, धैर्यवान और मुश्किल परिस्थितियों से धीरे-धीरे निकलने वाला बना सकता है। यह स्थिति जीवन में आने वाले बदलावों को लेकर सावधानी और जिम्मेदारी बढ़ा सकती है। हालांकि शनि का वास्तविक फल उसकी राशि, लग्न के अनुसार भावेशत्व, ग्रहबल और अन्य ग्रहों की दृष्टि पर निर्भर करता है।
आठवें भाव में गुरु
गुरु को शुभ ग्रह माना जाता है। आठवें भाव में इसकी स्थिति ज्ञान, संरक्षण, विरासत और साझा धन से जुड़े विषयों में सकारात्मक प्रभाव दे सकती है। कुछ ज्योतिषीय व्याख्याओं में गुरु को कठिन समय में सुरक्षा देने वाला माना जाता है। लेकिन केवल गुरु के शुभ ग्रह होने के आधार पर परिणाम तय नहीं किया जा सकता।
आठवें भाव में शुक्र और बुध
शुक्र आठवें भाव में हो तो रिश्तों, अंतरंगता, साझेदारी और जीवनसाथी के माध्यम से मिलने वाले आर्थिक संसाधनों से जुड़े सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। बुध इस भाव में व्यक्ति की शोध, विश्लेषण और गुप्त जानकारी समझने की क्षमता को मजबूत कर सकता है। ऐसी स्थिति रिसर्च, मनोविज्ञान, ज्योतिष, जांच-पड़ताल और दूसरे गहरे विषयों में रुचि से जुड़ सकती है।
आठवें भाव में सूर्य और चंद्रमा
सूर्य आठवें भाव में व्यक्ति की पहचान और जीवन के नजरिए में बड़े बदलाव ला सकता है। वहीं चंद्रमा भावनात्मक गहराई और संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। ऐसे व्यक्ति रिश्तों और अनुभवों की गहराई को अधिक महत्व दे सकते हैं।
आठवें भाव में मंगल, राहु और केतु
मंगल आठवें भाव में ऊर्जा और संकट से निपटने का साहस दे सकता है, लेकिन कमजोर स्थिति में दुर्घटना, चोट या विवाद से जुड़े जोखिमों की पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्या भी की जाती है। राहु रहस्य, अचानक बदलाव और अप्रत्याशित धन से जुड़े विषयों को बढ़ा सकता है, जबकि केतु व्यक्ति को आध्यात्मिकता, वैराग्य और गूढ़ विषयों की ओर आकर्षित कर सकता है।
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आठवें भाव पर ग्रहों की दृष्टि क्यों जरूरी है?
- गुरु की दृष्टि ज्ञान और संरक्षण से जुड़ी मानी जाती है।
- शनि की दृष्टि धैर्य और लंबे संघर्ष के बाद परिणाम से जुड़ सकती है।
- मंगल की दृष्टि ऊर्जा बढ़ाती है, लेकिन तनाव और विवाद की तीव्रता भी बढ़ाती है।
- राहु-केतु का प्रभाव रहस्य, अचानक बदलाव और आध्यात्मिक खोज से जुड़ होता है।
