इंदौर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही लोकमाता अहिल्याबाई की जयंती, राजवाड़ा पर महापौर ने किया नमन

Ahilyabai Holkar Jayanti Tributeलोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की जयंती पर इंदौर के राजवाड़ा उद्यान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मां अहिल्या को किया नमन
इंदौर के राजवाड़ा उद्यान में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते महापौर
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की जयंती के अवसर पर इंदौर के राजवाड़ा उद्यान में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने दी श्रधांजलि (फोटो सोर्स - नवभारत)
Published on
Updated on

Indore Ahilyabai Holkar Jayanti Tribute: इंदौर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की जयंती के पावन अवसर पर रविवार सुबह राजवाड़ा उद्यान परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मां अहिल्या की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में विधायक उषा ठाकुर सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। सभी ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

महापौर ने मां अहिल्या के आदर्शों को बताया प्रेरणास्रोत

इस अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर केवल मालवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका त्याग, बलिदान, संघर्ष, दूरदर्शी नेतृत्व और जनकल्याण के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि मां अहिल्या ने अपने शासनकाल में न्याय, विकास और जनभागीदारी का जो आदर्श स्थापित किया, वही आज इंदौर की पहचान और शक्ति है।

इंदौर के विकास और समरसता के लिए मांगा आशीर्वाद

महापौर ने कहा कि वे लोकमाता से प्रार्थना करते हैं कि उनका आशीर्वाद इंदौर शहर पर सदैव बना रहे। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर शहर स्वच्छता, विकास, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे।

यह भी पढें:

इंदौर की पहचान में रची-बसी हैं लोकमाता अहिल्याबाई

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर का इंदौर से विशेष और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। होलकर वंश की गौरवशाली शासक के रूप में उन्होंने मालवा क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी और इंदौर को सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शासनकाल में जनकल्याण, न्याय व्यवस्था, धार्मिक स्थलों के संरक्षण तथा आधारभूत विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई। आज भी इंदौर को अहिल्या नगरी के नाम से जाना जाता है और शहर की संस्कृति, विरासत तथा विकास की सोच में मां अहिल्या के आदर्शों की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। यही कारण है कि इंदौरवासी उन्हें केवल एक शासक नहीं, बल्कि लोकमाता के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करते हैं, इंदौर की पहचान भी अहिल्याबाई के राजवाड़ा से पहचानी जाती है

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com