Kalashtami Vrat 2026: मंगलवार को आषाढ़ मास की कालाष्टमी का व्रत, इन 5 गलतियों से खंडित हो सकता है आपका व्रत
Kalashtami Vrat 2026 Importance : आषाढ़ मास की कालाष्टमी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन की गई कुछ सामान्य गलतियां आपके व्रत का फल कम कर सकती हैं। जानिए पूजा के सही नियम
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान काल भैरव (सौ.AI)
Kalashtami Vrat Rules : मंगलवार 7 जुलाई को आषाढ़ मास की कालाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। भगवान काल भैरव की उपासना के लिए समर्पित कालाष्टमी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान काल भैरव की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की कई परेशानियां दूर होती है। ऐसे में आइए जानते हैं व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी तमाम बातें-
कब है जुलाई 2026 में कालाष्टमी?
ज्योतिष पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 7 जुलाई 2026 को दोपहर 1:24 बजे होगा और इसका समापन 8 जुलाई 2026 को दोपहर 12:21 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत और पर्व मनाने की परंपरा के अनुसार मासिक कालाष्टमी का व्रत 7 जुलाई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
धर्म शास्त्रों में कालाष्टमी व्रत का विस्तृत वर्णन किया गया है। कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन काल भैरव की पूजा करने से शत्रु बाधा, भय, ग्रह दोष और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. जो लोग नियमित रूप से कालाष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि, साहस और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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कालाष्टमी पर कैसे करें भगवान काल भैरव की पूजा
- कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
- इसके बाद व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान शिव और काल भैरव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- उन्हें चंदन, अक्षत, फूल, धूप, फल और मिठाई अर्पित करें ।
पूजा के दौरान ओम कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें। - काल भैरव चालीसा और आरती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है ।
- यदि संभव हो तो शाम या रात के समय भी भगवान काल भैरव की विशेष पूजा करें।
कालाष्टमी के दिन किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
धर्म शास्त्रों के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत रखते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। पूजा के दौरान साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखें तथा भगवान काल भैरव की पूजा पूरे श्रद्धाभाव से करें।
इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने, क्रोध करने या बेवजह विवाद करने से बचना चाहिए। जरूरतमंद लोगों, पशु-पक्षियों या किसी भी जीव को कष्ट न दें और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें।
