Kalashtami 2026: अधिकमास की कालाष्टमी को लेकर कंफ्यूज़न दूर, जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Kalashtami 2026 Shubh Muhurat: अधिकमास की कालाष्टमी को लेकर यदि आपके मन में तिथि को लेकर भ्रम है, तो यहां जानिए कालाष्टमी 2026 की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत एवं पूजन विधि।
Adhik Maas Kalashtami
काल भैरव देव (सौ.AI)
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Adhik Maas Kalashtami: भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव को समर्पित कालाष्टमी का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस बार अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत 08 जून को रखा जा रहा है।

धर्म शास्त्रों में काल भैरव को तंत्र-मंत्र का और संकटों का नाश करने वाला देवता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से कालाष्टमी के दिन पूरी भक्ति के साथ व्रत रखते हैं, उनके जीवन से अकाल मृत्यु का भय, नकारात्मक शक्तियां और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

अधिकमास की कालाष्टमी बेहद शुभ

ज्योतिषयों के अनुसार, अधिकमास की कालाष्टमी बहुत विशेष मानी जाती है, क्योंकि ये 3 साल में एक बार पड़ती हैं। मान्यता है कि अधिकमास में कालभैरव की पूजा-अर्चना का तीन गुना अधिक लाभ मिलता हैं।

अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 08 जून सोमवार को सुबह 03 बजकर 24 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 09 जून, मंगलवार को सुबह 03 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत 08 जून को रखा जाएगा।

कालाष्टमी पूजा का समय

शास्त्रों में कालाष्टमी व्रत की पूजा प्रदोष काल करने का विधान हैं। पंचांग के अनुसार, 08 जून को प्रदोष काल की शुरुआत 6 बजकर 30 मिनट पर होगी, जो शाम 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. ऐसे में इस दिन भक्तों को पूजा के लिए 01 घंटे का समय मिलेगा।

कालाष्टमी व्रत में क्या करें?

  • व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और काले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें।
  • भगवान भैरव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • उन्हें नीले फूल और काले तिल अर्पित करें।
  • इस दिन श्री काल भैरव अष्टकम या भैरव चालीसा का पाठ करना बहुत फलदायी होता है।
  • काला कुत्ता भगवान भैरव का वाहन माना जाता है।
  • इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाने से भैरव बाबा बहुत खुश होते हैं।
  • शाम के समय इस दिन किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे दीप दान जरूर करें।

व्रत के चमत्कारी लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।
  • इस पावन तिथि पर मंत्र जाप और पूजा करने से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • उपवास रखने से मन शांत होता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।
  • इस दिन व्रत रखने से कुंडली में कमजोर ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और परिवार में खुशहाली आती हैं।
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