काला महीना(सौ. Gemini)
Kala Mahina Kya Hota Hai: 15 मार्च को मीन संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाने वाला हैं। सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व हैं। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय से खरमास की शुरुआत मानी जाती है, जिसे कई लोग काला महीना भी कहते हैं। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में 15 मार्च को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने के साथ ही मीन संक्रांति मनाई जाएगी और इसी दिन से खरमास भी शुरू हो जाएगा।
यह समय धार्मिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ कामों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषयों के अनुसार, खरमास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे मांगलिक कार्य करना परंपरागत दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों में बाधा आ सकती है और इनसे लाभ की अपेक्षा से नुकसान होने की संभावना रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में नया घर लेना, जमीन खरीदना या कोई बड़ा निवेश करना अशुभ माना जाता है। इस समय लिए गए फैसले भविष्य में वित्तीय और व्यक्तिगत परेशानियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए इस अवधि में संपत्ति से जुड़े बड़े निर्णय को टालना ही बेहतर है।
खरमास के समय जल्दबाजी में निर्णय लेना सही नहीं होता। चाहे वह निजी जीवन से जुड़े फैसले हों या व्यवसायिक, संयम और धैर्य से काम लेना आवश्यक है। यह अवधि सोच-समझकर कार्य करने का संदेश देती है।
खरमास में धार्मिक साधना का विशेष महत्व है। अगर इस दौरान व्यक्ति पूजा-पाठ और धर्मकर्म से दूर रहता है, तो इसे अशुभ माना जाता है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना इस समय अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस समय दान-पुण्य करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अन्न, कपड़े, गुड़, तिल या धन का दान करना पुण्यकारी होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना खरमास की शुभता को बढ़ाता है।
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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस अवधि में रोजाना सूर्य देव को जल अर्पित करना, भगवान विष्णु का नाम स्मरण करना और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत लाभकारी होता है। इन साधनों से जीवन में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली आती है।