माता अनुसूया(सौ.AI)
Anusuya Jayanti Kab Hai 2026 : आज 3 अप्रैल 2026 से वैशाख महीने की शुरुआत हो गई है। हिन्दू धर्म में इस महीने का बड़ा महत्व होता है। इस महीने में कई व्रत- त्योहार पड़ते है। जिसका अपना अलग ही महत्व होता है। इसी महीने में अनुसूया जयंती भी मनाई जाती है। जो इस बार 6 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म ग्रथों के अनुसार, अनुसूया जयंती का पर्व माता अनुसूया का जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
हिन्दू धर्म ग्रथों में माता अनुसूया को पतिव्रता धर्म, त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति बताया गया है। अनुसूया जयंती के दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य, संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और माता अनुसूया की पूजा करती है।
माता अनुसूया की पतिव्रता शक्ति की ख्याति तीनों लोकों में फैली थी। एक बार नारद ऋषि ने उनकी महिमा सुनकर माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और माता पार्वती को बताया। जिज्ञासा वश तीनों देवियों ने त्रिदेव से उनकी परीक्षा लेने को कहा। तब त्रिदेव साधु वेश में महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे और उनकी अनुपस्थिति में माता अनुसूया से भिक्षा मांगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता अनुसूया ने साधुओं को देखकर उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। त्रिदेवों ने उनके आमंत्रण को स्वीकार किया और भोजन करने के लिए बैठे, लेकिन उन्होंने माता के सामने एक विचित्र शर्त रखी। उन्होंने कहा, “हम तभी भोजन ग्रहण करेंगे जब आप पूर्णतः निर्वस्त्र होकर हमें खाना परोसेंगी।
यह स्थिति एक पतिव्रता स्त्री के लिए बहुत बड़ा धर्मसंकट थी। लेकिन माता अनुसूया ने साधुओं के प्रति आदर दिखाते हुए उनकी शर्त स्वीकार कर ली। माता ने अपने हाथ में जल लेकर संकल्प किया और कहा, “यदि मेरा पतिव्रता धर्म सत्य है, तो ये तीनों साधु नन्हें बालक बन जाएं।
उनके इतना कहते ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश अबोध शिशु बन गए। इसके बाद माता ने उन्हें भोजन कराया और पालने में झुलाने लगीं।
जब बहुत समय बीत जाने के बाद भी त्रिदेव अपने वास्तविक रूप में वापस नहीं लौटे, तो तीनों देवियां व्याकुल हो गईं और नारद मुनि के साथ आश्रम पहुंचीं।
यह भी पढ़ें-वैशाख के महीने में इन चीजों के दान से मिलेगा अक्षय-पुण्य, साल भर बनी रहेगी भगवान की कृपा
वहां उन्होंने देखा कि माता अनुसूया तीन नन्हें बालकों को पालने में झुला रही हैं। तीनों देवियों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने माता अनुसूया से क्षमा मांगी और अपने स्वामियों को उनके वास्तविक रूप में लाने की प्रार्थना की।
शास्त्रों के अनुसार, माता अनुसूया ने फिर से जल का छिड़काव किया, जिससे त्रिदेव पुनः अपने वास्तविक रूप में लौट आए। माता की भक्ति से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया कि उनके गर्भ से पुत्र रूप में जन्म लेंगे। इस प्रकार माता अनुसूया और ऋषि अत्रि के पुत्र के रूप में त्रिदेव ‘भगवान दत्तात्रेय’ के रूप में जन्मे।