जया एकादशी पर तुलसी पूजा का ये अचूक विधि, बरसेगी भगवान विष्णु की असीम कृपा
Tulsi Plant Worship:जया एकादशी तुलसी माता का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अति प्रिय हैं। एकादशी पर तुलसी पूजन से विष्णु जी और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
श्री हरि विष्णु (सौ.सोशल मीडिया)
Jaya Ekadashi Ritual : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि प्रभु श्रीहरि की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस बार माघ महीने की एकादशी यानी जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। जो हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। इस दिन का सनातन धर्म में विशेष महत्व है।
इस दिन तुलसी माता का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अति प्रिय हैं। एकादशी पर तुलसी पूजन से विष्णु जी और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
इस विधि से करें तुलसी माता की पूजा
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
- भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
- संध्या समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और 7 या 11 परिक्रमा करें।
- तुलसी माता की आरती करें और मंत्रों का जप करें।
तुलसी जी के मंत्र –
1. महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
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2. तुलसी गायत्री – ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।
3. तुलसी नामाष्टक मंत्र –
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
इन गलतियों से करें अपना बचाव
- एकादशी तिथि के दिन तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही तुलसी के पत्ते उतारने चाहिए।
- एकादशी पर तुलसी के आस-पास साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
- तुलसी के आस-पास भूल से भी जूते-चप्पल, झाड़ू या फिर कूड़ेदान आदि न रखें।
- तुलसी को कभी गंदे या फिर जूठे हाथों से न छूएं।
- एकादशी तिथि पर स्नान करने के बाद ही तुलसी की पूजा करनी चाहिए।
- भगवान विष्णु की पूजा में अर्पित करने के लिए आप एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते उतारकर रख लें।
- एकादशी के दिन तुलसी की पूजा करते समय काले कपड़े न पहनें।
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जया एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
सनातन शास्त्रों में जया एकादशी की महिमा का वर्णन विस्तारपूर्वक किया गया है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। साथ ही साधक के पितरों को जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष मिलती है।
इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। इस व्रत के महत्व के बारे में भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को दिया था। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में लक्ष्मी नारायण जी की विशेष पूजा की जाती है।
