पातालेश्वर मंदिर में महादेव को चढ़ाते हैं झाड़ू, चर्मरोग से जहां मिल जाती है मुक्ति, जानिए कहां है यह महिमामय मंदिर
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके मनपसंद फूल, भोग या वस्तुओं को चढ़ाया जाता है, लेकिन शिवजी का एक मंदिर ऐसा है जहां रोग से मुक्ति के लिए शिव भक्त झाड़ू चढ़ाते हैं।आइए जानते है इस मंदिर की इस अनोखे परंपरा के बारे में
- Written By: सीमा कुमारी
पातालेश्वर मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Shiv Mandir: शिव भक्तों का महापर्व महाशिवरात्रि आने अब बस कुछ ही दिन है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की उपासना का महापर्व होता है। शिवरात्रि के दिन भक्तगण अपने भोले-भंडारी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और शिवलिंग का पूजन करते हैं, ताकि वे भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त कर सकें।
ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव मात्र एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। भोलेनाथ के कई मंदिर हैं। इनमें से कुछ ऐसे रहस्यमयी मंदिर हैं, जिनके रहस्य का आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है।
ऐसा ही एक मंदिर भारत के उत्तरप्रदेश राज्य के मुरादाबाद और संभल जिले के बहजोई के सादतबाड़ी नामक गांव में स्थित है। इस मंदिर को पातालेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता हैं। यह शिव मंदिर अपने आपमें अनोखा है। इस मंदिर में भगवान शिव को झाड़ू अर्पित की जाती है। आइए जानते है इस मंदिर की इस अनोखे परम्परा के बारे में-
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मुरादाबाद और आगरा के बीच स्थित है पातालेश्वर महादेव का मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार, पातालेश्वर मंदिर में झाड़ू चढ़ाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यहां लोग कांवड़ लेकर भी आते हैं और गंगाजल से महादेव का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि यहां हर सोमवार को दूर-दूर से भक्त आते हैं और प्रभु को झाड़ू चढ़ाते हैं।
चर्म रोग होता है दूर
स्थानीय लोगों का मानना है कि पातालेश्वर महादेव मंदिर में झाड़ू अर्पित करने से चर्म रोग से मुक्ति
मिलती है। सावन, महाशिवरात्रि और हर सोमवार पर यहां भारी संख्या में शिव भक्त आते हैं। मान्यता है कि यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है।
इस मंदिर में दूध, जल, फल-फूल, बेलपत्र, भांग और धतूरे के साथ ही सीकों वाली झाड़ू भी अर्पित की जाती है। ऐसा करने भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती हैं।
जानिए क्या है इस मंदिर से जुड़ी लोककथा
मान्यता है कि एक धनवान व्यापारी चर्म रोग से पीड़ित था। वह एक बार किसी वैद्य से अपना इलाज कराने जा रहा था तभी रास्ते में उसको प्यास लगी। अपनी प्यास बुझाने के लिए वह एक आश्रम में गया। जाते-जाते वह एक झाड़ू से टकरा गया। इतने में उसका चर्म रोग ठीक हो गया।
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माना जाता है कि उस झाड़ू के स्पर्श से ही उसका चर्म रोग ठीक हो गया। उसने उस आश्रम के संत को सोना और हीरा देने की पेशकश की, लेकिन संत ने ये सब लेने से मना कर दिया। संत ने उससे कहा कि आप इसी स्थान पर मंदिर बनवा दें तो अच्छा होगा। व्यापारी ने संत के कहे अनुसार आश्रम के पास शिव मंदिर बनवाया और वह मंदिर पातालेश्वर मंदिर नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस दिन से यहां झाड़ू अर्पित करने की मान्यता है।
