कैसे करें पहली बार एकादशी व्रत? क्या है पूजा विधि? जानिए सबकुछ
Ekadashi Vrat Niyam : अगर आप पहली बार एकादशी व्रत रखने की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो यहां जानिए व्रत रखने का सही तरीका, इस माह पड़ने वाली एकादशी की तारीख और पूजा विधि क्या है।
- Written By: सीमा कुमारी
एकादशी व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Ekadashi Vrat Kaise Kare: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। साल भर में कुल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है। हर महीने दो एकादशी पड़ती है। हर एकादशी का अपना अलग ही महत्व होता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन निर्जला व्रत भी किया जाता है। इस शुभ दिन पर तुलसी पूजन और परिक्रमा का भी विधान है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार मां तुलसी श्री विष्णु को अति प्रिय हैं।
अगर आप पहली बार एकादशी व्रत रखने की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो यहां जानिए व्रत रखने का सही तरीका, इस माह पड़ने वाली एकादशी की तारीख और पूजा विधि क्या है।
जया एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को सुबह 4:34 बजे होगी और इसका समापन 29 जनवरी 2026 को दोपहर 1:56 बजे होगा।
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उदयातिथि के अनुसार जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
कितने एकादशी व्रत करने चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत की शुरुआत किसी भी एकादशी से की जा सकती है, लेकिन उत्पन्ना एकादशी से व्रत आरंभ करना सबसे अधिक शुभ माना जाता है।
- उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
- शास्त्रों में कम से कम 5 से 11 वर्ष तक एकादशी व्रत करने का विधान बताया गया है।
- सामर्थ्य हो तो व्यक्ति आजीवन भी यह व्रत कर सकता है।
- यदि लंबे समय तक व्रत रखना संभव न हो, तो कम से कम 1 वर्ष तक व्रत कर उद्यापन करना चाहिए।
एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे करें?
- दशमी तिथि यानी एक दिन पहले
- शाम को केवल सात्विक भोजन करें।
- रात में भोजन न करें।
- एकादशी के दिन
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि नित्य कर्म करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें और घी का दीपक जलाएं।
- व्रत का संकल्प यह तय करें कि आप महीने की दोनों एकादशी करेंगे या केवल एक।
कैसे करें एकादशी व्रत की पूजा
- भगवान विष्णु को चंदन, पीले फूल, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
- तुलसी पत्र एक दिन पहले ही तोड़ लें, क्योंकि मान्यता है कि बिना तुलसी के श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते।
- सामर्थ्य हो तो निर्जला व्रत रखें, अन्यथा फलाहार कर सकते हैं।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
- शाम को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा कर आरती और भोग अवश्य लगाएं।
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द्वादशी तिथि पर व्रत पारण
अगले दिन शुभ मुहूर्त में गंगाजल और तुलसी दल ग्रहण कर व्रत खोलें।
भोजन का पहला निवाला गाय, पशु-पक्षियों या परिवार के किसी सदस्य को दें।
पारण से पहले जरूरतमंद को भोजन व दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।
