
शिवलिंग (सौ.सोशल मीडिया)
Anger Control Tips:मौजूदा समय में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव लोगों की आम समस्या बनती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ जाता है। इसका असर रिश्तों और सेहत पर भी पड़ता है। ऐसे हालात से निकलने के लिए ज्योतिष शास्त्र में शिवलिंग से जुड़े कुछ सरल उपाय बताए गए हैं। जैसा कि आप सभी जानते है कि भगवान शिव की पूजा में अलग-अलग चीजें चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है।
कोई जल चढ़ाता है, कोई दूध, कोई बेलपत्र, तो कई लोग दही भी चढ़ाते है। अक्सर लोग ये काम श्रद्धा से करते हैं, पर मन में सवाल रहता है कि आखिर दही चढ़ाने का मतलब क्या है और इससे क्या फायदा होता है?
शिवलिंग पर दही चढ़ाने की परंपरा सनातन धर्म में काफी प्राचीन मानी जाती है। शिव पूजा में जल, दूध और बेलपत्र के साथ-साथ दही भी अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि ऊर्जा, शांति और संतुलन का स्वरूप माना जाता है। वहीं दही को ठंडा और सुकून देने वाला पदार्थ माना गया है, जिसका संबंध सीधे मन की शांति से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि जिन लोगों को जल्दी गुस्सा आता या जो भीतर ही भीतर बेचैनी और तनाव महसूस करते हैं, उनके लिए दही से शिवलिंग का अभिषेक लाभकारी माना जाता है। दही की ठंडी तासीर मन की गर्मी को शांत करने का संकेत देती है। विशेष रूप से सोमवार के दिन यह उपाय करने से मानसिक तनाव कम होने की भावना बनती है।
दही को सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसी कारण इसे शिवलिंग पर चढ़ाना शरीर और मन दोनों को मजबूती देने का प्रतीक माना जाता है।
घर में बार-बार झगड़े होना या रिश्तों में कड़वाहट बढ़ना भी मानसिक अशांति का बड़ा कारण बनता है। दही को शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवलिंग पर दही चढ़ाने से घर के वातावरण में शांति और मधुरता आने की कामना की जाती है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार दही का संबंध चंद्र ग्रह से बताया गया है। चंद्र को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। जिन लोगों का चंद्र कमजोर होता है, वे शिवलिंग पर दही चढ़ाकर मन के डर, भ्रम और तनाव को कम करने की प्रार्थना करते हैं।
सुबह स्नान के बाद साफ मन से शिवलिंग पर थोड़ा-सा दही चढ़ाएं। इसके साथ जल अर्पित करें और मन में अपनी परेशानियों को रखते हुए शांति की प्रार्थना करें।
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पूजा के दौरान बहुत अधिक दही न चढ़ाएं, क्योंकि आस्था में संतुलन भी जरूरी माना गया है। थोड़ा-सा दही ही पर्याप्त होता है। पूजा के बाद शिवलिंग और आसपास की जगह की साफ-सफाई जरूर करें। यह भी समझना जरूरी है कि केवल पूजा से ही जीवन की सभी समस्याएं समाप्त नहीं होतीं।
आस्था के साथ सही कर्म और प्रयास भी जरूरी हैं, तभी मन में शांति और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।






