गुप्त नवरात्रि 2026 में आया पंचक का साया, क्या होगा इसका असर? ‘इन’ दिनों अग्नि से जुड़े ये काम बिल्कुल न करें
Agni Panchak 2026: गुप्त नवरात्रि 2026 के दौरान पंचक का संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अशुभ माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में अग्नि से जुड़े कुछ कार्य करने से नुकसान और बाधाएं बढ़ सकती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
गुप्त नवरात्रि पर पंचक का साया (सौ.सोशल मीडिया)
Panchak January 2026: 19 जनवरी 2026 से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। शास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलावा मां भगवती दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का समय साधना, तंत्र-मंत्र और विशेष पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी दौरान अगर पंचक का संयोग बन जाए, तो शास्त्रों में कुछ कार्यों करने को मना किया जाता है। जैसा कि आप जानते है कि पंचक हर महीने लगते है। इस बार अग्नि पंचक का आरंभ 20 जनवरी 2026 से हो चुका है।
जनवरी महीने के पंचक की अवधि
जनवरी महीने के पंचक आज देर रात 1 बजकर 35 मिनट पर शुरू होंगे। पंचक की यह अवधि 25 जनवरी 2026 को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। इस दौरान पंचक के विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है, खासकर अग्नि से जुड़े कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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पंचक में आग से जुड़े कौन-से काम न करें
नया चूल्हा या गैस जलाना नहीं चाहिए
पंचक में नया चूल्हा, गैस कनेक्शन या अग्नि से जुड़ा नया कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है।
हवन या यज्ञ करने से बचें
गुप्त नवरात्रि में साधना शुभ होती है, लेकिन पंचक काल में बिना योग्य मार्गदर्शन के हवन करना वर्जित माना गया है।
घर में आग से जुड़ा निर्माण कार्य न करें
जैसे किचन का निर्माण, फायरप्लेस या बिजली से जुड़े बड़े बदलाव टालना चाहिए।
अधिक आग का प्रयोग न करें
बेवजह दीये, मशाल या बड़ी अग्नि जलाने से बचें। केवल आवश्यक पूजा दीया ही जलाएं।
श्मशान या दाह संस्कार से जुड़े कार्य
पंचक में अग्नि संस्कार से जुड़ी प्रक्रियाओं को अशुभ माना गया है (विशेष परिस्थिति को छोड़कर)।
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पंचक में क्या करें
- मां काली या दस महाविद्याओं का मौन जप और ध्यान
- हनुमान जी या शिव जी की साधारण पूजा
- दान, सेवा और संयम का पालन
नकारात्मक विचारों से दूरी
ज्योतिषयों के मुताबिक, गुप्त नवरात्रि में पंचक का संयोग साधना के लिए संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान अग्नि से जुड़े कार्यों में सावधानी बरतना और शास्त्रीय नियमों का पालन करना जीवन में अनावश्यक बाधाओं से बचा सकता है।
