Gauri Vrat 2026: अखंड सौभाग्य के लिए खास माना जाता है यह व्रत, जानें व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
Gauri Vrat: गौरी व्रत को मोरकत व्रत भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति भाव से इस व्रत को करने से माता गौरी और भगवान शिव का अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- Written By: रीता राय सागर
गौरी व्रत (फोटो.सोशल मीडिया)
Mangla Gauri Vrat: भगवान शिव और माता गौरी की कृपा पाने के लिए रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत खासतौर पर अविवाहित स्त्रियां योग्य जीवनसाथी पाने की कामना से रखती है, जबकि विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर पांच दिनों तक चलने वाला यह व्रत इस बार 25 जुलाई 2026 से आरंभ होगा और 29 जुलाई यानी गुरु पूर्णिमा के दिन संपन्न होगा।
मंगला गौरी व्रत का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगला गौरी व्रत आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गौरी व्रत की शुरुआत शनिवार, 25 जुलाई 2026 से मानी जाएगी। इसी दिन देवशयनी एकादशी भी है, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है।
सम्बंधित ख़बरें
Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा के पाठ से इन लोगों का हो जाएगा बेड़ा पार! जीवन के कष्टों से मिलेगी मुक्ति
Skanda Shashthi: स्कंद षष्ठी की विधिवत पूजा से दूर होंगी परेशानियां, चुपचाप कर लें ये सरल उपाय
Lord Shiva Puja: महादेव शिव जी की पूजा में क्यों बजाते हैं 3 तालियां? जानिए इसके पीछे का रहस्य
नाग पंचमी के दिन तवे पर रोटी बनाने की क्यों है मनाही? जानिए सदियों से चली आ रही इस परंपरा की असली वजह
गौरी व्रत 2026 के शुभ मुहूर्त
गौरी व्रत के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक होगा। सुबह का शुभ-उत्तम मुहूर्त 7:21 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा, जबकि प्रदोष काल में लाभ-उन्नति मुहूर्त शाम 7:17 बजे से 8:34 बजे तक रहेगा।
गौरी व्रत 2026 की अवधि और समापन
गौरी व्रत कुल पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान व्रत रखने वाली महिलाएं पवित्र मिट्टी से मां गौरी, भगवान शिव और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाती हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विधिपूर्वक पूजा और आरती की जाती है। साथ ही रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व माना जाता है। पांचवें दिन आषाढ़ पूर्णिमा पर व्रत खोला जाता है और पारण किया जाता है।
गौरी व्रत 2026 का समापन
इस वर्ष पांच दिवसीय गौरी व्रत का समापन बुधवार, 29 जुलाई 2026 को होगा। आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 6:18 बजे से प्रारंभ होकर 29 जुलाई रात 8:05 बजे तक रहेगी।
गौरी व्रत का महत्व
गौरी व्रत को अविवाहित और विवाहित दोनों महिलाएं रखती हैं। मान्यता है कि मां गौरी और भगवान शिव की कृपा से विवाहित महिलाओं को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, अविवाहित युवतियां यदि पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करती हैं, तो उन्हें मनचाहा और योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मंगला गौरी की पूजा में 16 अंक का महत्व
मंगला गौरी व्रत सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव से करने पर माता पार्वती प्रसन्न होती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस व्रत में पूजा के लिए 16 माला, 16 लड्डू, 16 प्रकार के फल, 16 पान के पत्ते, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलायची और अन्य मांगलिक सामग्री एकत्र की जाती है।
मंगला गौरी व्रत की कथा
धर्मपाल नामक एक समृद्ध व्यापारी और उसकी पत्नी के पास धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनका कोई संतान नहीं था। ईश्वर की कृपा से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, किंतु उसके जीवन पर अल्पायु का संकट मंडरा रहा था। कहा जाता है कि सोलह वर्ष की आयु में सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो गई।
हालांकि उसका विवाह पहले ही हो चुका था। उसकी पत्नी की माता नियमित रूप से मंगला गौरी का व्रत करती थीं। माता गौरी की कृपा और व्रत के प्रभाव से परिवार पर आया यह सकंट टल गया और युवक को दीर्घायु प्राप्त हुई। इसके बाद वह सौ वर्ष तक जीवित रहा। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाने लगा।
