गरुड़ पुराण के नियम (सौ.सोशल मीडिया)
Garuda Purana Food Rules: हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष स्थान है। हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके घर में गरुड़ पुराण का पाठ जरुर किया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस पाठ से दिवंगत आत्मा को शांति प्राप्त होती है और उसे सद्गति का मार्ग मिलता है, जिससे वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सके।
गरुड़ पुराण में ये भी बताया गया है कि कुछ लोगों के घर पर भूलकर भी खाना नहीं खाना चाहिए। अन्यथा धन, सेहत आदि कई तरह की परेशानियां होती हैं। साथ ही आपके पापों में वृद्धि होती है और कर्मों पर असर पड़ता है। ऐसे में आइए गरुड़ पुराण के अनुसार जानते हैं किन लोगों के घर पर भोजन नहीं करना चाहिए?
जो लोग छल-कपट, हिंसा, झूठ, चोरी या अन्य अनैतिक कार्यों में लिप्त रहते हैं, उनके घर का अन्न ग्रहण करने से व्यक्ति के अपने कर्म भी प्रभावित होते हैं।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो लोग अपने माता-पिता, गुरु या बुज़ुर्गों का अपमान करते हैं, उनके घर का भोजन करने से पुण्य नष्ट होता है।
जहां हमेशा झगड़ा, गाली-गलौज, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों का माहौल रहता है, वहां का अन्न मन और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा प्रभाव डालता है।
जो लोग धर्म, सत्य और नियमों की अवहेलना करते हैं, उनके यहां भोजन करने से जीवन में बाधाएं और परेशानियां आ सकती हैं।
मृत्यु के तुरंत बाद शोक काल में भोजन ग्रहण करना वर्जित बताया गया है, क्योंकि उस समय वातावरण अशांत और दुखपूर्ण होता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार नशा, दुर्व्यसन और गलत आचरण करने वालों के घर का भोजन मानसिक और शारीरिक हानि पहुंचा सकता है।
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गरुड़ पुराण का मूल संदेश यही है कि अन्न हमेशा शुद्ध, सात्त्विक और श्रद्धा से दिया गया होना चाहिए। जिस घर में प्रेम, धर्म, सत्य और सदाचार होता है, वहां का भोजन व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता लाता है।
इसलिए भोजन करते समय केवल स्वाद नहीं, बल्कि भाव और वातावरण का भी ध्यान रखना चाहिए।