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कब है चैत्र महीने की पहली कालाष्टमी, इस तरह करें भगवान कालभैरव की पूजा, मिलेंगी शत्रुओं से मुक्ति

Lord Kalabhairav Blessings:चैत्र महीने की पहली कालाष्टमी 11 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन भगवान कालभैरव की पूजा और व्रत करने से शत्रुओं से मुक्ति, जीवन में सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Mar 03, 2026 | 07:09 PM

भगवान कालभैरव (सौ.AI)

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Kalashtami Vrat Kab Hai : कल 4 मार्च से चैत्र महीने की शुरुआत के साथ ही हिंदू नववर्ष का आगाज़ हो रहा है, जो आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जा रहा  है। इस महीने में कई व्रत त्योहार पड़ते है जिसका अपना अलग ही महत्व है।

इन्ही में से एक कालाष्टमी व्रत भी। भगवान शिव के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार चैत्र महीने की कालाष्टमी व्रत 11 मार्च को है।

कालाष्टमी का व्रत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

कालाष्टमी का व्रत भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत से अज्ञात भय, शत्रुओं और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों का नाश होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत साधक को पापों से मुक्ति, जीवन में सुख-समृद्धि, साहस और मानसिक शांति प्रदान करता है

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चैत्र महीने में कब है कालाष्टमी का व्रत

पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च 2026 की देर रात यानी 12 मार्च के शुरुआती घंटों में 01:54 बजे से होगी। धार्मिक पंचांग के जानकारों का कहना है कि यह तिथि अगले दिन यानी 12 मार्च को सुबह 04:19 बजे समाप्त हो जाएगी।

चूंकि, काल भैरव की मुख्य पूजा रात के समय की जाती है, इसलिए उदया तिथि और अर्धरात्रि पूजा के मेल को देखते हुए 11 मार्च को ही कालाष्टमी का व्रत और पूजन करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

यह भी पढ़ें:-किस दिन मनाई जाएगी होली भाई दूज? यहां जानिए सबसे सटीक तिथि, तिलक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कैसे करें भगवान कालभैरव की पूजा

  • इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर लेना चाहिए।
  • फिर एक लकड़ी का पाट लें और उस पर कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • इसके साथ ही शिवजी और माता पार्वती की तस्वीर भी यहां रखें।
  • इसके बाद हर तरफ गंगाजल छिड़क लें। फिर भगवान को फूलों की माला या फूल अर्पित करें।
  • फिर कालभैरव को नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि अर्पित करें।
  • फिर चौमुखी दीपक जलाएं। फिर धूप-दीप कर भगवान को कुमकुम या हल्दी का तिलक लगाएं।
    इसके बाद कालभैरव, भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • इसके बाद शिव चालिसा और भैरव चालिसा का पाठ भी करें।
  • फिर बटुक भैरव पंजर कवच का पाठ करें। भैरव मंत्रों का भी 108 बार जाप करें।
  • फिर कालभैरव की उपासना करें।
  • व्रत पूरा होने के बाद काले कुत्ते को कच्चा दूध या मीठी रोटी खिलाएं।
  • रात के समय काल भैरव की सरसों के तेल, उड़द, दीपक, काले तिल आदि से पूजा करें। फिर रात जागरण करें।

Chaitra first kalashtami puja lord kalabhairav

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Published On: Mar 03, 2026 | 07:09 PM

Topics:  

  • Kalashtami Vrat
  • Lord Shiva
  • Religion News

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