गणेश उत्सव के लिए इंजीनियर कलाकार ने बनाई अनूठी मूर्ति, ‘उड़ते बप्पा’ रखा नाम
आने वाले गणपति उत्सव को लेकर मुंबई के एक कलाकार ने भगवान गणेश की एक अनूठी मूर्ति तैयार की है। कलाकार ने अपनी इस खास कलाकृति को ऐसे बनाया है जिसमें मोदक हवा में उड़ता प्रतीत होता है।
- Written By: रीना पंवार
(सौजन्य सोशल मीडिया)
मुंबई : मुंबई के एक कलाकार ने आने वाले गणपति उत्सव को लेकर भगवान गणेश की एक अनूठी मूर्ति तैयार की है। पेशे से इंजीनियर कलाकार ने अपनी इस खास कलाकृति को ऐसे बनाया है जिसमें मोदक हवा में उड़ता प्रतीत होता है। यह मूर्ति 28 साल के मूर्तिकार रमाकांत देवरिया ने बनाई है। उन्होंने इसे ‘‘अनूठे गणपति” या ‘‘उड़ते बप्पा” नाम दिया है।
रमाकांत देवरिया पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। अपनी इस खास कलाकृति को लेकर रमाकांत देवरिया ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ‘मोदक’ को हवा में लहराने के लिए चुंबकीय सर्किट का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि इसे बनाना बिल्कुल भी आसान नहीं था।
सर्किट बनाने में लगे साढ़े तीन साल
रमाकांत देवरिया पिछले दो दशकों से भगवान गणपति की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां बना रहे हैं। उड़ते बप्पा को बनाने को लेकर देवरिया ने कहा, ‘‘मुझे यह विचार चार साल पहले उस वक्त आया जब मैं अपने सहकर्मियों से बात कर रहा था। मुझे इस चुंबकीय सर्किट को पूरा करने में लगभग साढ़े तीन साल लग गए। मैंने इसे इस तरह बनाया है कि यह बिल्कुल स्वाभविक लगे।”
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सजावट में कर सकते हैं मोदक का प्रयोग
रमाकांत देवरिया ने बताया कि उन्होंने भगवान गणपति की मूर्ति को मिट्टी से ही बनाया है। कलाकार ने बताया कि गणपति की मूर्ति को अनूठा बनाने के लिए उन्होंने हवा में लटका मोदक तैयार किया गया है। इसे मूर्ति के साथ नहीं जोड़ा गया है। लोग गणपति की मूर्ति के विसर्जन के बाद इसका इस्तेमाल सजावट के रूप में भी सकते हैं। ‘उड़ते बप्पा” को लेकर कलाकार देवरिया की योजना है कि पहले वह इन मूर्तियों को अपनी दुकान में लगाएंगे और अगर लोगों ने इसे पसंद किया तो वह इस तरह के और डिजाइन तैयार करेंगे। देवरिया ने बताया कि उन्हें बचपन से ही मूर्तियां बनाने का काफी शौक है, हालांकि अब वह पुणे में इंजीनियर हैं लेकिन सप्ताहांत में वह कलाकृतियां बनाते हैं।
7 सितंबर से शुरू होगा गणपति उत्सव
उल्लेखनीय है कि गणपति उत्सव अगले महीने सितंबर से मनाया जाएगा। पूरे भारत में गणेशोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘मुख्य गणेश चतुर्थी’, ‘विनायक चतुर्थी’, ‘कलंक चतुर्थी’ और ‘डंडा चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है। 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव इस वर्ष 7 सितंबर 2024 से आरंभ होगा और विसर्जन 17 सितंबर 2024 को होगा। इसी दिन विश्वकर्मा पूजा भी होती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
