Ekadashi Vrat: पहली बार रख रहे हैं निर्जला एकादशी का व्रत? इन 5 बातों का रखें ध्यान, तभी मिलेगा पूरा पुण्यफल
Ekadashi Vrat Rules:निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यदि आप पहली बार यह व्रत रखने जा रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण नियमों और सावधानियों का पालन करना जरूरी है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु (सौ.AI)
Nirjala Ekadashi Vrat Precautions: सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। इस वर्ष 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाले इस व्रत को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस व्रत को रखते हैं।
अन्य एकादशियों की तुलना में निर्जला एकादशी अधिक कठिन मानी जाती है, क्योंकि इसमें एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तक अन्न और जल का त्याग किया जाता है। ऐसे में अगर आप पहली बार यह व्रत रखने जा रहे हैं, तो इसके जरूरी नियमों के बारे में जरूर जान लें।
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व्रत के दौरान अन्न और जल का त्याग करें
शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम अन्न और जल का त्याग है। एकादशी तिथि शुरू होने के बाद भोजन और पानी ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकता है।
सुबह स्नान के बाद करें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा
निर्जला एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन के पापों का नाश होता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
द्वादशी के दिन शुभ समय में करें पारण और दान
व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब उसका पारण सही समय पर किया जाए। इसलिए द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में निर्जला एकादशी व्रत का पारण करें। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, वस्त्र या धन का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि दान करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करना भी है जरूरी
निर्जला एकादशी केवल उपवास का नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर संयम रखने का भी पर्व है। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध, झूठ, विवाद तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। कहा जाता है कि मन की शुद्धता के बिना व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।
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पारण के बाद सात्विक भोजन ही करें
निर्जला एकादशी का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। पारण के बाद केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस दिन लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, मांस और मदिरा जैसी तामसिक चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। सात्विक भोजन करने से व्रत का प्रभाव और भी शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है। इसलिए अगर आप पहली बार यह व्रत रखने जा रहे हैं, तो इन नियमों का पालन जरूर करें।
