Ekadashi Vrat Katha: देवशयनी एकादशी कल,भगवान विष्णु को प्रसन्न करना है तो पूजा के बाद जरूर पढ़ें ये कथा
Ekadashi Vrat Katha 2026: देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कथा पढ़े बिना व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु (सौ.जैमिनी)
Devshayani Ekadashi Vishnu Katha : देवशयनी एकादशी 2026 का व्रत 25 जुलाई शनिवार को रखा जाएगा। साल भर में पड़ने वाली 24 एकादशी में देवशयनी एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु सृष्टि का पूरा कार्यभार भगवान शिव को सौंप कर पूरे चार महीने के लिये योगनिद्रा में चले जाते हैं और उसके बाद वे देवोत्थान एकादशी वाले दिन उठते है।
लोक एवं धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन विष्णु भक्त पूजा, व्रत विधि-विधान से करते हैं, लेकिन इस व्रत का पूरा पुण्यफल तभी प्राप्त होता है, जब आप इसकी पूजा करते समय श्री हरि की महिमा का गुणगान करने वाली कथा का पाठ नहीं करते है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस कथा का पाठ करने या सुनने मात्र से मनुष्य को मृत्यु के पश्चात वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आइए राजा मांधाता से जुड़ी इस कथा को विस्तार से जानते हैं-
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देवशयनी एकादशी व्रत की कथा
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राज्य में भयंकर पड़ा अकाल
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यवंश में मांधाता नाम के एक महान और धर्मपरायण राजा राज्य करते थे। वे अपनी प्रजा से संतान की तरह प्रेम करते थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी और समृद्ध थे। लेकिन एक समय ऐसा आया जब लगातार तीन वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। सूखे अकाल के कारण खेत बंजर हो गए, अन्न की कमी हो गई और यज्ञ-हवन भी बंद हो गए। बताया जाता है कि, पूरा राज्य अकाल की चपेट में आ गया और प्रजा दुखी हो गई ।
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महर्षि अंगिरा से मिला समाधान
जब प्रजा ने अपनी परेशानी राजा को बताई, तो उन्होंने इसका उपाय खोजने का निश्चय किया। राजा मांधाता कई ऋषि-मुनियों के आश्रमों में गए और अंत में ब्रह्माजी के पुत्र महर्षि अंगिरा से मिले। उन्होंने महर्षि को प्रणाम कर पूछा कि राज्य में इतना बड़ा संकट क्यों आया है और इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।
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देवशयनी एकादशी व्रत से दूर हुआ संकट
महर्षि अंगिरा ने राजा से कहा, “हे राजन! आप आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी (पद्मा) एकादशी का पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ व्रत करें। इस व्रत के प्रभाव से सभी संकट दूर होंगे और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी।
राजा मांधाता ने महर्षि की बात मानी। उन्होंने अपनी पूरी प्रजा के साथ श्रद्धापूर्वक देवशयनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा की। व्रत के प्रभाव से कुछ ही समय बाद घने बादल छा गए और अच्छी वर्षा हुई. सूखा समाप्त हो गया, खेतों में हरियाली लौट आई, फसलें लहलहाने लगीं और पूरे राज्य में फिर से सुख, शांति और समृद्धि आ गई।
