Vikarna (Source. Pinterest)
Vikarna: The Kaurava Brother: महाभारत की कथा में जहां अधिकांश कौरवों को अन्याय के पक्ष में खड़ा दिखाया गया है, वहीं एक ऐसा नाम भी सामने आता है जिसने सच्चाई का साथ देने की हिम्मत दिखाई। यह नाम है विकर्ण दुर्योधन का वह भाई जिसने द्रौपदी चीर हरण के समय खुलकर विरोध किया था।
जब कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान किया जा रहा था, तब अधिकांश लोग मौन थे। लेकिन उसी समय विकर्ण ने आगे बढ़कर इसका विरोध किया।
विकर्ण ने साफ कहा कि:
उसकी बातों में सच्चाई थी, लेकिन सत्ता और अहंकार के आगे उसकी आवाज दबा दी गई।
हालांकि विकर्ण को सही और गलत का पूरा ज्ञान था, लेकिन जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, तो उसने कौरवों का ही साथ दिया। यह स्थिति उसकी किंकर्तव्यविमूढ़ता को दर्शाती है एक तरफ धर्म की समझ, दूसरी तरफ परिवार के प्रति कर्तव्य। यही द्वंद्व उसे अंत तक कौरवों के साथ खड़ा रखता है।
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महाभारत युद्ध के दौरान विकर्ण का सामना भीम से हुआ। युद्ध के समय भीम ने विकर्ण को समझाया:
लेकिन विकर्ण ने जवाब दिया कि:
अंततः भीम को मजबूरी में विकर्ण का वध करना पड़ा।
विकर्ण एकमात्र कौरव था, जिसकी मृत्यु के बाद पांडवों को भी गहरा दुख हुआ क्योंकि: Vikarna
विकर्ण की कहानी हमें यह सिखाती है कि सिर्फ सही को पहचानना ही काफी नहीं, बल्कि सही के साथ खड़ा होना भी जरूरी है। कई बार परिस्थितियां हमें मजबूर कर देती हैं, लेकिन इतिहास हमेशा उसी को याद रखता है जो सच का साथ देता है।