हरियाली अमावस्या के दिन इन चीजों के दान से पितृदोष से मिलेगी मुक्ति, ग्रहदोष भी
सावन महीने में पड़ने के कारण इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस शुभ अवसर पर साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। महादेव का जलाभिषेक एवं पूजा भी करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
हरियाली अमावस्या (सौ.सोशल मीडिया)
Hariyali Amavasya 2025 Daan:सनातन धर्म में सावन अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व हैं। साल 2025 में सावन अमावस्या 25 जुलाई, गुरुवार को हैं। हिंदू मतों के अनुसार, सावन महीने में पड़ने के कारण इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, इस शुभ अवसर पर साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद देवों के देव महादेव का जलाभिषेक एवं पूजा भी करते हैं।
वहीं, अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। धार्मिक मत है कि अमावस्या तिथि पर दान करने से साधक पर महादेव की कृपा बरसती है। साथ ही कुंडली में व्याप्त अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
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साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है। अगर आप भी पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो हरियाली अमावस्या के दिन पूजा और तर्पण के बाद इन चीजों का दान करें।
हरियाली अमावस्या के दिन करें इन चीजों का दान
चावल का दान
ज्योतिषयों के अनुसार, अगर कोई जातक पितृदोष से निजात पाना चाहते हैं, तो हरियाली अमावस्या के दिन शिवजी की पूजा करें। साथ ही पितरों का तर्पण करें। वहीं, पूजा के बाद काले तिल, जौ, कच्चा चावल, चूड़ा, दही, चीनी, नमक आदि चीजों का दान करें।
छतरी का दान
पितरों को प्रसन्न करने के लिए हरियाली अमावस्या के दिन आप छतरी, चमड़े के जूते और चप्पल आदि चीजों का भी दान कर सकते हैं। आप ये चीजें योग्य ब्राह्मण या जरूरमंदों को पितरों के नाम पर दे सकते हैं।
सफेद वस्त्र का दान
अगर आप पितरों का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो सावन अमावस्या के दिन शिव मंदिर में काले तिल या तिल के तेल का दान करें। इसके अलावा, आप सफेद वस्त्र और प्रसादम (प्रसाद) हेतु अन्न का भी दान कर सकते हैं।
कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए हरियाली अमावस्या के दिन छाता, जूते, चप्पल, साबुत उड़द, कंबल और वस्त्र आदि चीजों का दान कर सकते हैं।
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दूध, दही आदि चीजों का दान
अगर आप देवों के देव महादेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान के बाद दूध या गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके बाद सफेद चीजों का दान करें। आप चावल, आटा, चीनी, नमक, दूध, दही आदि चीजों का दान करें।
