महाकुंभ में कल्पवास का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
प्रयागराज: उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में आने वाले साल महाकुंभ का आगाज होने जा रहा है वहीं पर 13 जनवरी की शुभ तिथि पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचेंगे। इस महाकुंभ में स्नान करने का जहां पर महत्व होता है वहीं पर बड़ी संख्या में गंगा घाट के किनारे श्रद्धालु कल्पवास करने के लिए भी आते हैं। कहा जाता है 100 सालों का कल्पवास में फल मिलता है चलिए जानते है…
आपको बताते चलें कि, धार्मिक आयोजन महाकुंभ में होने वाले कल्पवास के दौरान सभी प्रकार के पापों, कायिक, वाचिक और मानसिक से मुक्ति मिलती है और ईश्वर के चरणों में स्थान प्राप्त होता है। सूर्य ग्रह द्वारा जब मकर राशि में प्रवेश किया जाता है तब कल्पवास की शुरुआत होती है।
इसके अलावा कल्पवास को लेकर कहा जाता है कि, एक तरह से कठिन व्रत और जीवनदायिनी साधना के रुप में माना जाता है। यहां पर कल्पवास व्रत का महत्व यह होता है कि, अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और उसे आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है। आज हम आपको कल्पवास से संबंधित खास जानकारी देने जा रहे हैं।
यहां पर कल्पवास को लेकर प्रयागराज के श्री महंत महेश्वर दास अध्यक्ष पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा ने बताया कि महाकुंभ में कल्पवास का महत्व होता है। गंगा किनारे के तटों पर कल्पवास किया जाता है। हिंदू धर्म में कल्पवास को लेकर कहा जाता है कि, जीवन में एक बार माघ या श्रवण के महीने के मेले में कल्पवास करना शुभ माना जाता है। यहां पर वैदिक काल से कल्पवास का महत्व होता है इसमें साधु और श्रद्धालु कुटिया बनाकर कल्पवास किया जाता है।
सनातन धर्म में कहा जाता है कि, जीवन नें एक बार तीर्थ यात्रा करने का महत्व होता है। इसमें सौ सालों के बराबर का कल्पवास का फल एक कल्पवास कुंभ के दौरान करने से प्राप्त होता है ।कल्पवास बालक,वृद्ध,युवा सभी कर सकते है, बस आपके अंदर श्रद्धा का भाव होना चाहिए, पति पत्नी भी एक साथ कल्पवास कर सकते है।
आपको यहां पर कल्पवास के दौरान के नियम होते है इसमें सत्य वचन बोलना, दया भाव होना, अहिंसा, इन्द्रियों पर नियंत्रण, ब्रह्मचर्य का पालन, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जागना, नियमित स्नान, पितरों का पिंडदान, जाप,देवी-देवताओं का पूजन आदि विभिन्न नियमों का पालन करने से व्यक्ति को कल्पवास का पुण्य प्राप्त होता है। इस दौरान सात्विक प्रकार का भोजन करना चाहिए।
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यहां पर भोजन के कई प्रकार की श्रेणी होती है इसमें गिना जाता है…
भोजन के प्रकार की श्रेणी
सात्विक भोजन
राजसी भोजन
तामसिक भोजन
राक्षसी भोजन