खूब धन कमाना चाहते हो: श्री प्रेमानंद जी महाराज का संदेश और सच्चे धन की पहचान

Shri Premanand Ji Maharaj: जहाँ इंसान का पूरा मन केवल एक रुपये के पीछे भाग रहा है। हर कोई धन कमाने की होड़ में लगा है, लेकिन यह भूल जाता है कि अंत समय में यही पैसा और संपत्ति किसी काम नहीं।
Do you want to earn a lot of money Sri Premanand Ji Maharaj's message and the identification of true wealth.
Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
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What is True Wealth According To Shri Premanand Ji Maharaj: इस संसार में एक अजीब सा खेल चल रहा है, जहाँ इंसान का पूरा मन केवल एक रुपये के पीछे भाग रहा है। हर कोई धन कमाने की होड़ में लगा है, लेकिन यह भूल जाता है कि अंत समय में यही पैसा और संपत्ति किसी काम नहीं आने वाली। जीवन का बड़ा हिस्सा इंसान इसी चिंता में बिता देता है कि बैंक बैलेंस कितना बढ़ा, लेकिन जब अंतिम साँसें बचती हैं, तब एहसास होता है कि हाथ कुछ भी नहीं आया। श्री प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संग में कहते हैं कि यदि जीवन केवल धन की लालसा में बीत गया, तो अंत में गहरा पश्चाताप ही शेष रह जाता है।

मोह के तीन बड़े चोर: धन, भोग और यश

महाराज के अनुसार इंसान को आत्मिक मार्ग से भटकाने वाले तीन सबसे बड़े चोर हैं। पहला है धन का लोभ। आज स्थिति यह है कि लोग कथा, यज्ञ और धार्मिक कर्म भी इस उम्मीद से करते हैं कि बदले में कुछ भौतिक लाभ मिल जाए। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो केवल धर्म या श्रीकृष्ण प्रेम के लिए कर्म करते हैं। दूसरा चोर है भोग की तृष्णा। इंसान सोचता है कि इच्छाएँ पूरी करने से शांति मिलेगी, जबकि इच्छा आग की तरह है जितना ईंधन डालो, उतनी ही भड़कती है। तीसरा चोर है यश की भूख। कई साधक लोभ और काम को तो साध लेते हैं, लेकिन नाम और पहचान की चाह भीतर ही भीतर बनी रहती है।

इंद्रियों पर विजय ही असली साधना

इन जालों से निकलने के लिए संतों के वचनों को अपनाना जरूरी है। श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि साधक को चार चीजों पर अधिकार पाना चाहिए आहार, निद्रा, भय और मैथुन। इसकी शुरुआत भोजन से होती है। जब तक खाने पर संयम नहीं होगा, तब तक नींद, क्रोध और वासना पर भी नियंत्रण संभव नहीं है। संतुलित और सीमित आहार से ही मन और इंद्रियाँ वश में आती हैं।

वैराग्य में ही सच्ची समृद्धि

एक सिद्ध आत्मा वही है जो "नित्य तृप्त" और "निराश्रय" हो, यानी जिसे संसार से कुछ पाने की लालसा न हो और जो केवल भगवान पर आश्रित हो। ऐसे लोग अपने कर्तव्य पूरे करते हैं, लेकिन फल की इच्छा नहीं रखते। महाराज समझाते हैं कि धन के लिए व्याकुल न हों, ईमानदारी से अपना कर्म करें और जैसी परिस्थिति हो, उसी में संतोष से जीवन जिएँ।

जागो, समय बहुत कम है

श्री प्रेमानंद जी महाराज चेतावनी देते हैं कि यदि आज मोह की नींद से नहीं जागे, तो अवसर हाथ से निकल सकता है। "Radha Radha" नाम का स्मरण हृदय की अशुद्धियों को धो देता है। जब इच्छाओं का तूफान उठे, तो सांसारिक सहारों की बजाय भगवान के नाम और संतों की शिक्षाओं के पर्वत की शरण लें तूफान खुद थम जाएगा।

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