गणाधिप संकष्टी पर गलती भी न करें ये काम, वरना बप्पा हो सकते हैं नाराज़!
Lord Ganesha:शनिवार 8 नवंबर को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत है।शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
गणाधिप संकष्टी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां (सौ.सोशल मीडिया)
Ganadhipa Chaturthi 2025:हिन्दू धर्म में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक शुभ एवं पावन दिन माना जाता है। इस बार गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत शनिवार 8 नवंबर को है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हालांकि, व्रत का पूरा फल पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना और कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए। वरना पूजा का फल नहीं मिलता है, तो आइए इस खबर में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
गणाधिप संकष्टी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
न करें तामसिक भोजन का सेवन
किसी भी व्रत के दिन शुद्ध सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन इस दिन पूर्ण रूप से वर्जित है। इसके अलावा व्रत के दौरान मन और शरीर की पवित्रता बनाई रखनी चाहिए। केवल फलाहार या सात्विक आहार ही लें।
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अपशब्दों का प्रयोग
कहा जाता है कि, व्रत के दिन घर में नकारात्मक माहौल बनाना, झगड़ा करना या किसी को अपशब्द कहना पूजा के फल को नष्ट कर देता है। ऐसे में पूरे दिन शांति, सकारात्मकता और पवित्रता बनाए रखें। साथ ही “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते रहें और गणेश जी की कथा सुनें।
काले या नीले वस्त्र पहनना
गणेश जी की पूजा में काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस शुभ दिन पर लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े पहनें। कहते हैं कि लाल रंग गणेश जी को प्रिय है और यह सौभाग्य का प्रतीक है।
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चंद्र दर्शन और अर्घ्य न देना
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है। बहुत से लोग रात में चंद्रोदय का इंतजार किए बिना ही व्रत खोल लेते हैं, जिससे व्रत अधूरा रह जाता है। वहीं, सूर्यास्त के बाद, चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध और जल मिश्रित अर्घ्य जरूर दें। ऐसा करने चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली से चंद्र दोष भी दूर होता है।
